अगर गंगा की गहराई होती तो पानी उसके पेटा में समाकर बहता और बाढ़ जैसी स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता। गंगा बेसिन के अध्ययन के बाद यह निष्कर्ष निकला है कि गंगा के जलग्रहण क्षेत्र को बाधित होने से रोकना होगा और उसे मुक्त करना होगा।
गंगा की डिसिल्टिंग करनी होगी।आईआईटी बीएचयू के नदी विज्ञानी प्रो. यूके चौधरी का कहना है कि भारत जितनी समतल भूमि दुनिया में किसी भी देश के पास नहीं है। 2003 से गंगा देश की इस समतल भूमि के मृदा क्षरण के लिए बदनाम हो चुकी है।
22 साल बाद भी इसका कोई ठोस इंतजाम नहीं हो सकता है। गंगा बेसिन के खेतों के मिस मैनेजमेंट के कारण गंगा में सेरिमेंटेशन लोड हर साल बढ़ता जा रहा है। इसके कारण गंगा भी साल दर साल शहर से दूर होती जा रही हैं।