वाराणसी। घाटों के आसपास गंगा आरती करते हुए स्कल्पचर लगाने की तैयारी चल रही है। जगह अभी फाइनल नहीं है। बनाए गए स्कल्पचर को दशाश्वमेध प्लाजा के बाहर हरे रंग के पर्दे से ढंककर रखा गया है। इनकी संख्या अभी चार है। एक का वजन तकरीबन 50 किलो है। इसमें इस्तेमाल होने वाला वेस्ट मेटल है।
शहर में 60 से अधिक स्थानों पर स्टोन, फाइबर और मेटल के बने हुए स्कल्पचर लगाए जा रहे हैं। इसमें से 35 स्कल्पचर इंस्टॉल किए जा चुके हैं, जबकि 25 और इंस्टॉल किए जाएंगे। कबाड़ से बनी ये कलाकृतियां न केवल वाराणसी की सुंदरता को बढ़ा रही हैं, बल्कि यह भी दर्शाती हैं कि रचनात्मकता और रीयूज के माध्यम से अनुपयोगी वस्तुओं को भी मूल्यवान और आकर्षक बनाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया जा रहा है। महिला सशक्तीकरण, पर्यावरण, खेल, मिलेट्स, योग, हस्तशिल्प, जैसे मुद्दों पर समाज को जागरूक करती हुई मूर्तियां आमजन को संदेश भी देंगी।
ये स्कल्पचर स्थानीय लोगों और आगंतुकों के लिए लैंड मार्क का काम भी कर रहे हैं। वीडीए के अलावा बरेका, रेल मंत्रालय, संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से इसे बनाकर इंस्टॉल किया जा रहा है। शहर में कुल 60 ये अधिक स्कल्पचर बनाए जा चुके हैं। वीडीए के उपाध्यक्ष पुर्ण बोरा की देखरेख में काम तेज हुआ है। कहा कि रिसाइकल, रीयूज के तहत स्क्रैप का इस्तेमाल करके स्कल्पचर तैयार कराए जा रहे हैं।