भक्त करते हैं पूजन
चतुर्थ विनायक यात्रा निर्देश में कपर्दीश्वर गणेश के दर्शन होते हैं। दूसरे आवरण में तीसरे नंबर पर शूलटंक विनायक का स्थान है। बड़ा गणेश का वर्णन 56 विनायक यात्रा के क्रम में तीसरे आवरण में प्रथम स्थान पर वक्रतुंड विनायक के रूप में मिलता है और अष्ट प्रधान विनायक यात्रा में संदर्भ स्थान पर भी यही स्थान है।
डॉ. उपेंद्र विनायक सहस्त्रबुद्धे का कहना है कि काशी और चतुर्दिक परिक्रमा मार्ग पर कुल मिलाकर 74 गणेश-विनायक मंदिर होने की स्थिति बनती है। लेकिन प्रमुखतः 67 विनायक-गणेश के संदर्भ ही मिलते हैं। अनेक विनायकों के नाम और स्थान ही काशी की रक्षा की भूमिका स्पष्ट करते हैं।
मंदिरों के शहर बनारस में 33 कोटि देवी-देवता विराजमान हैं। सात वार नौ त्योहार की नगरी काशी में भोलेनाथ और मां पार्वती के पुत्र प्रथमेश के 67 पीठ विराजमान हैं। इसमें 11 गणेश पीठ और 56 विनायक पीठ हैं। इनका अलग-अलग महत्व, अलग-अलग छवि और काम भी अलग हैं। महाराष्ट्र के बाद काशी ही है जहां पूरे उत्साह के साथ गणेशोत्सव मनाया जाता है और पंडाल सजाए जाते हैं।
बाबा विश्वनाथ की नगरी की कल्पना गणेशजी के बिना अधूरी है। काशी में चतुर्थ विनायक यात्रा, पंचामृत विनायक यात्रा और अष्ट प्रधान विनायक यात्रा प्रमुख है। अष्ट विनायक यात्रा में प्रथम स्थान यात्रा निर्देश सिद्धि विनायक को प्राप्त है जबकि 56 विनायक के प्रथम आवरण में आठवां स्थान निर्देश भी सिद्धि विनायक रूप को प्राप्त है। इसी तरह 56 विनायक की यात्रा के क्रम में तृतीय आवरण में चतुर्थ स्थान पंचाएम विनायक का है।
दुर्ग की रक्षा करते हैं दुर्ग विनायक
दुर्ग विनायक का दायित्व दुर्ग की रक्षा से संबद्ध होना प्रतीत होता है। इसी तरह देहली विनायक, काशी में प्रवेश की सुरक्षा, (यह स्थान पंचक्रोशी मार्ग पर है, जो काशी का वाह्य आवरण है।), पाशपाणि विनायक-दंडाधिकारी, अविमुक्त विनायक- अविमुक्तेश्वर की निजी सुरक्षा, ज्ञान विनायक- काशी की ज्ञान संपदा (ब्राह्मण वेदपाठी आदि) का संरक्षण, गणनाथ विनायक-गणेश के प्रमुख स्वरूप और काशी के समस्त गणेश विनायक स्वरूपों पर नियंत्रण का दायित्व (गणों के नाथ अर्थात गणनाथ)। इसके अतिरिक्त चतुर्थ विनायकों में शामिल विनायकों में भागीरथी गणाध्यक्ष, भागीरथी अर्थात गंगा की सुरक्षा और बिंदु विनायक-बिंदु माधव की निजी सुरक्षा और काशी में गंगा के उत्तर वाहिनी स्वरूप के केंद्र की सुरक्षा करते हैं।
चतुर्थ विनायक यात्रा
- भागीरथी गणाध्यक्ष- लाहौरी टोला, मकान नंबर-1/40 फुटहा गणेश
- हरिश्चंद्र विनायक-संकठाघाट के पास, सीके 7/166
- कपर्दीश्वर गणपति- पिशाचमोचन सी 21/40
- बिंदु विनायक- बिंदु माधव मंदिर पंचगंगा घाट के 22/36