लाल बाग के राजा वाराणसी में पधारेंगे। गणेशोत्सव का आयोजन 13 से 23 सितंबर तक किया जा रहा है। उत्सव की तैयारियों को लेकर मराठा समुदाय में खास उत्साह है। मूर्तिकार भी भगवान गणेश की प्रतिमाओं को आकार देने में लगे हैं। शहर के कई स्थानों पर पंडाल सजने लगे हैं। गायघाट, सुकुलपुरा, नवापुरा, रामनगर, गढ़वासी टोला, चौक इनमें मुख्य हैं। गुरुवार को भगवान गणपति पंडालों में विराजेंगे।
काशी के ज्योतिषाचार्यों की मानें तो गणेश चतुर्थी के दिन गणपति के पूजन से समस्त दुखों का हरण और जीवन मंगलमय होगा। काशी विद्वत परिषद के संगठन मंत्री पं. दीपक मालवीय के अुनसार भाद्रपद शुक्ल पक्ष चतुर्थी को गणेश चतुर्थी का व्रत किया जाता है। पूरे महाराष्ट्र में 10 दिन तक बड़े ही धूमधाम से यह उत्सव मनाया जाता है।
गणेश जी के जन्मोत्सव के साथ इस चतुर्थी का पूर्ण संबंध है। कथा के अनुसार भगवान गणेश के गजवदन को देखकर चंद्रमा ने हंसी उड़ाई थी। इसपर गणेश जी ने चंद्रमा को श्राप दिया कि आज से तुझे जो देखेगा उसे पाप व मिथ्या कलंक लगेगा। चंद्र के क्षमा मांगने व कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर शाप का निवारण करते समय गणपति ने कहा कि केवल भाद्र शुक्ल चतुर्थी के दिन जो तुम्हें देखेगा उसे मिथ्या झूठा कलंक लगेगा पर उस दिन जो मेरा पूजन करेगा उसका दोष दूर होगा।