जिले के बड़ागणेश, चिंतामणि गणेश, ढुंढ़ीराज विनायक, दुग्ध विनायक आदि मंदिरों में दर्शन के लिए भीड़ जुटी है। बड़ा गणेश मंदिर के मंहत राजेश तिवारी ने बताया गणेश चौथ पर श्रद्धालु दूर-दूराज से दर्शन करने आते हैं। मंदिर के कपाट भोर में मगंला आरती के बाद खोल दिए गए। दोपहर में भोग आरती की गई। रात में मंदिर का कपाट रात में 12 बजे बंद होगा। गणेश जी यहां त्रिनेत्र के रूप में दर्शन देते हैं। भीड़ को देखते हुए मंदिर जाने वाले मार्ग पर बैरिकेडिंग की गई है। बैरिकेडिंग लोहटिया सड़क तक हुआ है। कबीरचौरा, काशीपुरा और डीएवी पीजी कालेज की तरफ से दो पहिया वाहन पर प्रतिबंध है।
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ऐसे करें गणपति की पूजा
शुचिता के साथ निराहार व निराजल व्रत रखकर शाम को श्रीगणेश जी की षोडशोपचार पूजा करनी चाहिए। श्रीगणेश जी को अतिप्रिय दूर्वा एवं मोदक, ऋतुफल, मेवे एवं मोदक आदि नैवेद्य अर्पित करना चाहिए। तिल व गुड़ से बने मोदक अर्पित करने की विशेष मान्यता है। श्रीगणेश स्तुति, संकटनाशन श्रीगणेश स्तोत्र, श्रीगणेश सहस्त्रनाम, श्रीगणेश अथर्वशीर्ष, श्रीगणेश चालीसा का पाठ एवं श्रीगणेश सबंधी मंत्रों का जप करना चाहिए।
पूरे साल के संकष्टी श्रीगणेश चतुर्थी व्रत
छह जनवरी, पांच फरवरी, छह मार्च, पांच अप्रैल, पांच मई, तीन जून, तीन जुलाई, दो अगस्त, 31 अगस्त, 29 सितम्बर, 29 अक्तूबर, 27 नवंबर, 26 दिसम्बर को श्रीगणेश चतुर्थी व्रत रखा जाएगा। काशी में प्रमुख श्रीगणेश मन्दिरों में श्रीबड़ा गणेश, श्रीचिन्तामणि गणेश, श्रीदुर्गविनायक गणेश, साक्षी विनायक गणेश, ढुण्डीराज गणेश आदि शामिल है।