उन्होंने लिखा कि सर्व सेवा संघ की ओर से जमीन से संबंधित नोटिफिकेशन व पत्राचार साक्ष्य के रूप में नहीं उपलब्ध कराया, इसलिए यह रेलवे की जमीन है। यानी सेल रजिस्टर्ड डीड, खसरा-खतौनी एवं पिछले 63 वर्षों से इस जमीन पर कार्यरत सर्व सेवा संघ का कोई महत्त्व नहीं है। जिलाधिकारी का यह निर्णय न्यायसंगत नहीं है। उसी दिन रेलवे के अधिकारियों ने सर्व सेवा संघ के सभी भवनों पर 30 जून को 9 बजे से पहले तक यह जमीन खाली कर देने की नोटिस चस्पा किया और सभी भवनों को गिराने का आदेश दिया है।
सर्व सेवा संघ ने इसके खिलाफ उच्च न्यायालय इलाहाबाद में याचिका दायर की है। इसकी सुनवाई 28 जून को हुई और 30 जून को अगली सुनवाई होगी। उच्च न्यायालय ने जिलाधिकारी और रेलवे को कहा है कि 30 जून को कोई कार्रवाई नहीं करें। फिर भी प्रशासन गिराने पर आमादा है। देशभर के गांधीवादी संगठन, जेपी आंदोलन के लोग, सामाजिक संगठनों व राजनीतिक दलों के लोग इस बात से चिंतित है और शुक्रवार को यहां पहुंच रहे हैं। रामधीरज ने बताया कि यह एक जमीन या भवन का सवाल नहीं है। यह गांधी विचार, विनोबा विचार को देश से मिटाने का षड़्यंत्र है। जिस तरह से साबरमती आश्रम को खत्म किया गया वे सर्व सेवा संघ को खत्म कर रहे हैं।
सर्व सेवा संघ की जमीन को बचाने के लिए देश भर से गांधीवादी विचारक व बुद्धिजीवी वाराणसी पहुंचने लगे हैं। मेधा पाटकर देर रात के बाद और प्रो. आनंद कुमार शुक्रवार सुबह पहुंचेंगे। इसके अलावा डॉ सुनीलम, पूर्व सांसद अनिल हेगड़े, रघु ठाकुर, अमरनाथ, महादेव, बिहार से विनोद रंजन, पंकज, विजय, मनोहर मानव, सत्येंद्र सिंह, जेपी सिंह और अनोखेलाल सहित 50 से अधिक लोग पहुंच चुके हैं। इसके अलावा लोकतंत्र सेनानी विजय नारायण, पूर्व एमएलसी अरविंद सिंह, राधेश्याम सिंह, सतनाम सिंह, कांग्रेस के प्रांतीय अध्यक्ष अजय राय, संजीव सिंह, विनय राय मुन्ना, गांधी स्मारक निधि के लाल बहादुर राय, राबर्ट्सगंज से पूर्व चेयरमैन समाजवादी अजय शेखर भी पहुंच रहे हैं।