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असि की तबाही के पीछे करोड़ों का खेल

Sat, 23 Apr 2016 02:02 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
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असि नाले के रूप में रह गई असि की पहचान।
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लापरवाही, अदूरदर्शिता और जल्दबाजी के चलते असफल हो चुके गंगा एक्शन प्लान के प्रथम चरण की कार्ययोजना असि नदी का तबाही की बड़ी वजह है। इस परियोजना को साकार करने के नाम पर गंगा की आड़ में असि नदी की धारा मोड़ी गई और बड़े कारखानों, प्रतिष्ठानों के साथ ही शहर के आधे से अधिक हिस्से की सीवर लाइन जोड़कर पापमोचनी धारा को नाले में तब्दील कर दिया गया। इस दुस्साहस भरे कारनामे की वजह से ही असि संगम का स्थान बदलकर नगवा नाले को जन्म दे दिया गया।
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अस्सी घाट पर 1980 तक जहां असि-गंगा संगम था, वहां महज तीन सौ मीटर दूर नगवा मोहल्ले में पुलिया के पास विष्णुपदी नदी की धारा मोड़ी गई है। असि की धारा सिर्फ इसलिए मोड़ दी गई, कि उन दिनों गंगा एक्शन प्लान के तहत निर्मलीकरण की करोड़ों रुपये की योजना को चटपट साकार करने का ख्वाब देख रहे थे। इसके लिए डीरेका के अलावा बीएचयू के सरसुंदर लाल अस्पताल के नालों को असि में मिलाया गया। इतना ही नहीं शहर के आधे हिस्से यानी सुंदरपुर से लेकर भेलूपुर तक की आबादी की सीवर लाइन असि नदी में जोड़ दी गई। इसके लिए अस्सी मुहल्ले में ही पुष्कर तालाब के सामने पुलिया के पास एसटीपी का निर्माण कराया गया। अस्सी सीवेज पंप गृह करोड़ों की लागत से बना और घरेलू, औद्योगिक कचरे के साथ अवजल का भंडारण कर लिया गया लेकिन इसके पीछे सतह पर काम कुछ नहीं हो पाया था। असि नाले में तब्दील हो गई। उसकी धारा मोड़ दी गई।



वाराणसी नाम को साकार करने वाले असि-गंगा संगम तीर्थ को पाटकर खत्म कर दिया गया लेकिन शहर का सीवर वैसे ही गंगा में गिराया जाने लगा। मुहल्ले के लोग बताते हैं कि करीब 25 वर्ष से उस एसटीपी को कभी चलते हुए नहीं देखा गया। कागज पर वहां अब भी कर्मचारी तैनात हैं लेकिन एसटीपी की मशीनों में जंग लग चुकी है। ओवरहेड टैंक के अलावा अन्य उपकरण नष्ट हो रहे हैं। अस्सी निवासी दीनानाथ शर्मा, गणेश शंकर मिश्रा, सरिता मिश्रा, विनय बताते हैं कि उनकी जानकारी में असि-गंगा संगम आबाद था। हालांकि तब भी उसमें शहर की गंदगी बहाई जाती थी लेकिन गंगा एक्शन प्लान प्रथम चरण की कार्ययोजना के आने के बाद उसे पाट दिया गया। नदियों पर काम करने वाले रमेश चोपड़ा का कहना है कि गंगा एक्शन प्लान के करोड़ों रुपये हजम करने के लिए असि नदी पर दिखावे का एसटीपी बनाया गया। इसके एवज में असि का प्रवाह मोड़ कर उसे नगवा नाले में मिला दिया गया। इसकी जांच कराई जाएगी तो बड़ा घोटाला सामने आएगा और असि की तबाही के सच से भी लोग परिचित हो जाएंगे।
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