कोरोना संक्रमण ने मानवीय संवेदनाओं को तार-तार कर दिया है। बावजूद इसके कुछ लोग ऐसे हैं जो निस्वार्थ भाव से लोगों की मदद कर रहे हैं। वाराणसी के अर्दली बाजार के गिरिजेश प्रताप सिंह की मौत के बाद जब कोई रिश्तेदार नहीं पहुंचा तो परंपराओं को दरकिनार करते हुए उनकी वकील बिटिया ने पिता को मुखाग्नि दी।
बुधवार को गाजीपुर के रहने वाले गिरिजेश प्रताप सिंह की हालत गंभीर रूप से खराब हो गई। बेटियां जब अपने बीमार पिता को लेकर मंडलीय चिकित्सालय पहुंची जहां चिकित्सों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। बेटियों ने पड़ोसी और रिश्तेदारों को इसकी जानकारी दी लेकिन कोई भी नहींं पहुंचा। अमन कबीर की नजर जब रोती-बिलखती बेटियों पर पड़ी तो उन्होंने सहायता केलिए हाथ बढ़ाया।
शव को लेकर जब वह घर पहुंची तो भी कोई मदद के लिए नहीं पहुंचा था। इसके बाद अमन ने सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी दी। इसके बाद मोनू, हिमांशु, राकेश, विनय और विजय मदद के लिए पहुंच गए। सभी के सहयोग से मणिकर्णिका घाट शव ले जाया गया। तीनों बेटियों में बड़ी बेटी कात्यायनी ने मृत पिता के शव को मुखाग्नि दी।
पिता को अंतिम विदाई देते समय तीनों बेटियों की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। गिरिजेश प्रताप सिंह अदली बाजार में अपनी पत्नी पुष्पा, बेटियों कात्यायनी, दिव्या और तृप्ति के संग किराए पर रहते थे। गिरिजेश पेशे से अधिवक्ता थे। बड़ी बेटी कात्यायनी भी इलाहाबाद हाईकोर्ट में अधिवक्ता हैं। बेटी कात्यायनी ने बताया कि पिता जी और परिवार के अन्य लोग कई दिनों से बीमार थे।
बुधवार की सुबह अचानक पिता जी की हालत बिगड़ गई और आनन फानन में उन्हें सरकारी एम्बुलेंस से मंडलीय चिकित्सालय ले गए जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मां गृहणी हैं। छोटी बहन दिव्या प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करती है और सबसे छोटी तृप्ति काशी विद्यापीठ से पीजी कर रही है। बताया कि इस दुख की घड़ी में हम सबके लिए मसीहा बनकर आए अमन यादव कबीर और उनके साथियों ने मेरी सहायता की और पिता का विधिपूर्वक क्रियाकर्म करवाया।