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Varanasi News: अस्सी से तुलसी घाट तक टीले जैसी मिट्टी और मलबे, जहां स्नान कर रहे, वहीं पेशाब की बदबू

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- गंगा की बीओडी - 4 मिलीग्राम प्रति लीटर, होनी चाहिए तीन के आसपास
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- बीएचयू के वैज्ञानिक बोले- गंगा में मिल रहे एक लीटर सीवेज में 1.21 मिलीग्राम अमोनियम आयन

माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। बीएचयू के वैज्ञानिकों और रिसर्च लैब ने भी माना है कि गंगा में गंदगी से निजात अभी नहीं मिलने वाली। अस्सी घाट पर गंगा दशहरा के सजे मंच से लेकर तुलसी घाट तक दिख जाएगा। मगर वहां तक गंदगी भी दिखेगी। सोमवार को अमर उजाला की पड़ताल में सामने आया कि अस्सी से तुलसी घाट के किनारे फूल माला व निर्माल्य फेंके हुए हैं। बीच-बीच में मिट्टी के टीले, कूड़ों के ढेर और मलबा पटा हुआ है। बीच-बीच में छोटी नालियों से गंदे पानी के साथ प्लास्टिक भी बह रहा था। तुलसी घाट पर जहां लोग स्नान कर रहे थे, वहीं पेशाब की बदबू और कई तरह की गंदगियों का अंबार लगा था।


बीएचयू के पर्यावरणविद और वैज्ञानिक रसायन विज्ञान विभाग के डॉ. कृपा राम की ओर से किए गए शोध में सामने आया है कि सीवेज के नमूनों और नालियों में बाइकार्बोनेट, सल्फेट, नाइट्रेट और फॉस्फेट आयनों की मात्रा काफी ज्यादा पाई गई है। इससे नदी में प्रदूषकों का स्तर बढ़ गया। वहीं, हानिकारक अमोनियम आयन (1.21 मिलीग्राम/लीटर) सिर्फ सीवेज में ही पाया गया है। जबकि सल्फेट, नाइट्रेट और फॉस्फेट आयनों के उच्च स्तर के चलते नदी में शैवाल बढ़ रहे हैं जिससे पानी की गुणवत्ता और खराब हो रही है। हाल के अध्ययनों से पता चला है कि बढ़ते शहरीकरण और बिना ट्रीट किए हुए सीवेज और नालियों के सीधे गंगा में मिलने से सबसे ज्यादा प्रदूषण बढ़ा है।
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गंगा की बीओडी 4, वरुणा नदी में 56 मिलीग्राम प्रति लीटर
गंगा के पानी का बायोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) तीन के आसपास संतुलित होता है। इस महीने में अस्सी घाट के आसपास गंगा का बीओडी चार मिलीग्राम प्रति लीटर पाया गया है। जबकि राजेंद्र प्रसाद घाट पर बीओडी 3.6 मिलीग्राम प्रति लीटर है। वहीं, वरुणा नदी में 56 मिलीग्राम प्रति लीटर है। गंगा में डीओ यानी कि डिजॉल्व्ड ऑक्सीजन की मात्रा 7 मिलीग्राम प्रति लीटर है। वरुणा नदी में 1.6 मिलीग्राम प्रति लीटर है। गंगा का तापमान 29 डिग्री सेल्सियस से भी ज्यादा है।
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आईआईटी में फ्रांस और डेनमार्क की तकनीक से चल रही सफाई
आईआईटी बीएचयू में फ्रांस और डेनमार्क की तकनीक से गंगा लैब और एसएलआर स्मार्ट लैबोटरी ऑन क्लीन रिवर के कुल चार प्रोजेक्ट चल रहे हैं। 2026 में दो खत्म होंगे और बाकी 2027 तक चलेंगे। अस्सी में वाटर ट्रीटमेंट का प्रोजेक्ट पूरा हो गया है। इसके चलते गंगा में सीधे पानी नहीं छोड़ा जा रहा है। आईआईटी के वैज्ञानिकों का मानना है कि इन प्रोजेक्ट के चलते गंगा की स्वच्छता में काफी सुधार आया है।
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