फ्रांसीसी नागरिक माइकल मोर्लियर
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वाराणसी में पेट के कैंसर के अंतिम स्टेज से गुजर रहे प्रभु माइकल मोर्लियर जो फ्रांस के रहने वाले थे। डॉन के द्वारा जीवन के सीमित अवधि यही होने के डिक्लेरेशन के बाद मोक्ष की प्राप्ति के लिए वाराणसी काशी आ गए थे। गले में ओम की माला पहने काशी में यह आए थे।
वाराणसी के कबीर चौरा अस्पताल से अपना घर आश्रम वाराणसी में जीवन के अंतिम चरणों को बितानी हेतु भेजा गया था।आश्रम में उनकी सेवा प्रभु स्वरूप में लगातार की जाती रही। लेकिन विधि के विधान के अनुसार, आज 8 नवंबर को सुबह आठ बजे इन्होंनेआश्रम में अंतिम सांस ली। आश्रम में यह एक सप्ताह से बड़े ही आनंद से थे।
जब भी कोई उनके पास जाता था मुस्कुराते हुए स्वागत करते थे। उन्हें पता था कि जीवन के अंतिम क्षण करीब आ रहा है। क्योंकि फ्रांस में इनके पेट के मेजर ऑपरेशन के उपरांत डॉक्टर ने उनकी जीवन काल को बहुत ही कम समय का बताया था। जिसके आधार पर यह काशी आ गए थे। आश्रम में देहासन के बाद फ्रांस एंबेसी एवं लोकल इंटेलीजेंस यूनिट को सूचना दे दी गई।
एंबेसी के सदस्यों के अनुसार, उनके परिवार तक सूचना दी गई है। इनका अपना कोई नहीं है। इनके दूर के रिश्तेदार हैं। जिनसे बातचीत होती रहती है। अगर वह भारत आने में तैयार होते हैं तो मृत शरीर सोप जा सकता है। अन्यथा की स्थिति में विधिक कार्रवाई के तहत उनकी अंतिम क्रिया फ्रांसीसी दूतावास के सलाह के अनुसार वाराणसी की लोकल पुलिस के द्वारा की जाएगी। फिलहाल, पंचनामा के उपरांत प्रभु माइकल के मृत शरीर को पुलिस को सौंप दिया गया है। 72 घंटे के उपरांत ही पुलिस प्रशासन द्वारा कोई निर्णय लिया जाएगा।