फोटो त्रिलोचन घाट का, लोकेशन चांदपुर की और पिनकोड चौबेपुर
- फोटो : अमर उजाला
वाराणसी में गंगा की सफाई के लिए तीन करोड़ की स्कीमर मशीन के लोकेशन का खेल भी नजर आ रहा है। मशीन संचालक की ओर से अमर उजाला को लोकेशन सहित भेजे फोटो में घाटों की सफाई का दावा किया गया है। मगर जो फोटो भेजे हैं, उन पर जगह कहीं की दिख रही और लोकेशन किसी और जगह की दर्शाई है।
एक फोटो गोला घाट से सटे त्रिलोचन घाट पर मैनुअली सफाई का है। इस पर लोकेशन चांदपुर की लिखी गई है और पिनकोड चौबेपुर का है। तीन करोड़ की स्कीमर मशीन को गंगा की धारा से प्लास्टिक कचरा और फूल, माला तथा पूजा सामग्री निकालने के लिए तैनात किया गया है।
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नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा को प्रतिदिन मशीन से सफाई का फोटो वीडियो भेजा जाता है, इसी के आधार पर साढे़ तीन लाख रुपये महीने का भुगतान होता है। अमर उजाला ने रविवार के अंक में यह खुलासा किया था कि स्कीमर मशीन अधिकांश समय गोलाघाट पर खड़ी रहती है, केवल आसपास के घाट पर कुछ देर सफाई की जाती है। कर्मचारी घाट पर बैठे ताश खेलते नजर आते हैं।
इसी तरह एक अन्य फोटो के बारे में संचालक ने शीतला घाट के पास मशीन से सफाई का दावा किया। इस पर जो लोकेशन दर्शाई गई वह चांदपुर की थी और पिनकोड 221104 लिखा था, जो कि चौबेपुर का है। इस संबंध में जब मशीन सुपरवाईजर से पूछा गया कि लोकेशन चांदपुर क्यों दर्शाई है तो उसने कहा कि इस संबंध में उसे कोई जानकारी नहीं है।
दूसरी ओर नगर निगम के अपर नगर अयुक्त का दावा है कि गंगा सफाई की मॉनिटरिंग नगर निगम के कर्मचारियों की ओर से नियमित की जा रही है। मशीन के सफाई के फोटो के आधार पर ही भुगतान होता है।
खिड़किया घाट पर हुई सफाई
स्कीमर मशीन से अस्सी घाट से खिड़किया घाट तक रोज सफाई करनी है। रविवार को अमर उजाला में खबर छपने के बाद मशीन गोला घाट से खिड़किया घाट तक गई और सफाई का काम किया। सुपरवाइजर और मजदूरों ने बताया कि हम लोगों ने दोपहर तक खिड़किया घाट पर सफाई की और कचरे को पेटी तक पहुंचाया। ज्यादा कचरा मालाओं और फूल का था। अपर नगर आयुक्त अजय कुमार सिंह ने कहा कि गंगा सफाई के लिए चल रही मशीन के बारे में शिकायत मिली हैं। इसकी जांच कराते हैं कि आखिर यह सफाई कैसे की जा रही है।
ये है स्कीमर मशीन
गंगा किनारे खड़ी स्कीमर मशीन
- फोटो : amar ujala
ठेकेदार के अनुसार स्कीमर मशीन की कीमत तीन करोड़ रुपए है, इसके संचालन पर करीब 3.5 लाख रुपए प्रतिमाह खर्च आता है। मशीन पर कुल 12 लोगों तैनात हैं। इनमें से 10 लोग माशीन संचालित करते हैं, जबकि दो लोग सुरक्षा के लिए तैनात हैं। मशीन में डीजल और पेट्रोल के दो इंजन लगे हैं।
अगर बहाव की दिशा में जाना है तो डीजल इंजन से काम लिया जाता है और विपरीत दिशा में जाने पर दोनों इंजन चलाने होते हैं। शनिवार दोपहर को गोला घाट पर मशीन खड़ी थी। इसका लंगर घाट पर लगे लोहे के गार्डर में बंधा था। कर्मचारी घाट पर बैठकर ताश खेल रहे थे। मशीन के बकेट में कचरा भरा था, उसे निकाला नहीं गया था।