शैलेंद्र के अनुसार, वर्ष 2023 में सुषमा रतन की सहमति से उनका नाम राजस्व अभिलेखों में संपत्ति के स्वामी के रूप में दर्ज हुआ था। आरोप है कि इससे पहले सुषमा रतन ने तीन दिसंबर 2022 को भवन के संबंध में एक लीज डीड पंजीकृत कराई थी। इसमें खुद को भवन की स्वामिनी और बनारस पब्लिक स्कूल की प्रबंधक बताया गया।
शैलेंद्र का आरोप है कि लीज डीड गलत तथ्यों पर आधारित थी। दस्तावेज में 18 जून 2000 से 30 वर्ष की लीज दर्शाई गई, जबकि इसका पंजीकरण तीन दिसंबर 2022 को हुआ। उनका कहना है कि वर्ष 2000 में संबंधित भवन उनके पिता जित्तूराम वर्मा के नाम दर्ज था और वर्ष 2023 तक राजस्व अभिलेखों में भी उन्हीं का नाम रहा।
आरोप है कि सुषमा रतन ने भवन पर कब्जा करने के उद्देश्य से कथित तौर पर जाली लीज डीड तैयार कराई और उसका इस्तेमाल बनारस पब्लिक स्कूल का लाइसेंस हासिल करने में किया।
अदालत ने वादी के अधिवक्ता की दलीलें सुनने के बाद कैंट पुलिस को प्राथमिकी दर्ज कर मामले की विवेचना करने का आदेश दिया। अब पुलिस आरोपों और संबंधित दस्तावेजों की जांच करेगी।