जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि फर्म द्वारा जीएसटी रिटर्न में जो विवरण दाखिल किए गए थे, वे पूरी तरह संदिग्ध थे। आरोपी ने बिना किसी वास्तविक खरीद-बिक्री के फर्जी टैक्स इनवॉइस जारी किए और जीएसटी रिटर्न में फर्जी सप्लाई दर्शाकर अन्य फर्मों को अनुचित रूप से इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का लाभ दिलाया। इस तरीके से लगभग 12 करोड़ रुपये की जीएसटी ठगी की गई।
पुलिस के अनुसार, आरोपी के खिलाफ जीएसटी चोरी से संबंधित एक अन्य मामला भी दर्ज है, जिसकी जांच जारी है। प्रारंभिक पूछताछ में इस बात के संकेत मिले हैं कि इस फर्जीवाड़े में अन्य लोगों की भी संलिप्तता हो सकती है।
गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में फर्जी नाम और पते पर फर्म पंजीकृत कर जीएसटी चोरी के मामलों में तेजी आई है। वर्ष 2020 के बाद से ही ऐसे कई बड़े मामलों का खुलासा हो चुका है, जिनमें करोड़ों रुपये की कर चोरी पकड़ी गई है। फिलहाल पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है और इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी है।