Varanasi News: भीषण गर्मी में अब सड़कों पर पानी की समस्याएं होने लगी हैं। प्यास लगने पर गला तर करने के लिए लोग सड़कों और गलियों में नल खोजने लगते हैं। वहीं, जलकल विभाग समय-समय पर हैंडपंप लगवाने के अलावा रीबोर व दूसरी तकनीकी कमियों को दूर करने की व्यवस्था करता है।
वाराणसी के प्रमुख चौराहों पर एक समय 434 चार मुंह वाले शेर के नल लोगों की प्यास बुझाते थे। अब ये नल धीरे-धीरे गुम होते जा रहे हैं। इनकी जगह टोटी लग रहे हैं। कई जगहों पर चार मुंह वाले शेर के नल हैं, उनमें पाइप लगाकर नल लगा दिया गया है और बीच में सीमेंट भर दिया गया है। इस समय 20 से 25 नल ही बचे हैं।
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लक्सा और भदैनी में इक्का दुक्का ऐसे नल देखे जा सकते हैं। इसका स्वरूप अब बदल गया है। अधिकांश नल काम ही नहीं कर रहे हैं। लोगों को पीने के पानी के लिए लगाए गए सरकारी स्टैंड पोस्ट की भी हालत ठीक नहीं है। कुछ वर्षो में अधिकतर स्टैंड पोस्ट अतिक्रमण की भेंट चढ़ गए हैं। जलकल विभाग समय-समय पर हैंडपंप लगवाने के अलावा रीबोर व दूसरी तकनीकी कमियों को दूर करने की व्यवस्था करता है।
बचे हुए 25 में से अधिकतर नलों में पानी नहीं आ रहा है। गोदौलिया, गिरजाघर, लक्सा, गुरुबाग, रथयात्रा, लंका, भेलूपुर, नगवां, भदैनी में कुछ वर्ष पहले तक सरकारी नल दिख जाते थे, लेकिन अधिकतर स्थानों पर शेर के मुंह वाले नल नदारद हैं।
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संस्थाएं बुझा रहीं प्यास
सार्वजनिक स्थानों पर पेयजल की व्यवस्था कराकर लोगों की प्यास बुझाने की जिम्मेदारी जलकल विभाग की है, लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया जाता है। सैकड़ों स्थानों पर रोटरी, लायंस क्लब व विभिन्न व्यापारिक संगठनों के सहयोग से आरओ सहित वाटर कूलर व प्याऊ की व्यवस्था कराई गई है।
बोले अधिकारी
चार मुंह वाले शेर के नलों से पानी की काफी बर्बादी होती थी। उसकी जगह अब नल लगाए गए हैं। ये नल बंद रहते हैं। जरूरत के अनुसार, लोग नल खोलकर पानी ले सकते हैं। - विजय नारायण मौर्य, महाप्रबंधक जलकल