दो चरणों में होगा कायाकल्प
कॉरिडोर के तहत मंदिर की धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान को बरकरार रखते हुए परिसर को आधुनिक सुविधाओं से विकसित किया जाएगा। दो चरणों में होने वाले काम में भव्य मुख्य प्रवेश द्वार, मंदिर परिसर का विस्तार, सुंदरीकरण, चौड़े रास्ते, व्यवस्थित गलियारे और श्रद्धालुओं के लिए जरूरी सुविधाओं का विकास शामिल है। परिवहन मंत्री ने कहा कि बलिया भृगु बाबा के नाम से जाना जाता है। कॉरिडोर बनने के बाद भृगु मंदिर को अंतरराष्ट्रीय स्तर की पहचान दिलाने का प्रयास होगा। यह केवल निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि बलिया की आस्था, पहचान और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा विषय है।
सप्त ऋषियों की लगेगी आर्ट गैलरी
कॉरिडोर परिसर में सप्त ऋषियों से जुड़ी जानकारी भी प्रदर्शित की जाएगी। इसके लिए आर्ट गैलरी और विवरण पट्टिकाएं लगाने की योजना है। इनमें गौतम ऋषि, परशुराम ऋषि, महर्षि वाल्मीकि, मेधा ऋषि, कुशी ऋषि, पराशर ऋषि समेत अन्य ऋषियों के जीवन और परंपरा से जुड़ी जानकारी दी जाएगी।
81 महिला लाभार्थियों का हुआ सम्मान
कार्यक्रम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर आयोजित सेवा सप्ताह से भी जोड़ा गया। विधानसभा क्षेत्र के 75 शक्ति केंद्रों से आईं प्रधानमंत्री आवास योजना की 81 महिला लाभार्थियों को नारियल, स्मृति चिह्न, साड़ी और अन्य उपहार देकर सम्मानित किया गया। टघरौली की कविता देवी को शौचालय योजना, हनुमानगंज की निर्मला देवी को प्रधानमंत्री आवास योजना तथा टोल टैक्स, कदम चौराहा की रूपा सिंह को आवास और उज्ज्वला योजना का लाभ मिलने पर सम्मानित किया गया। नगवां, दुबहड़ की कुसुम पाठक को लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने और जागरूक करने में योगदान के लिए सम्मान मिला।
धार्मिक पहचान को पर्यटन से जोड़ने की तैयारी
भूमि पूजन के बाद संत-महात्माओं और श्रद्धालुओं की मौजूदगी में महाआरती हुई। दीपों की कतार और भृगु बाबा के जयकारों से मंदिर परिसर गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने कॉरिडोर निर्माण की शुरुआत को बलिया की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम बताया। मान्यता है कि महर्षि भृगु ने गंगा तट पर स्थित इस क्षेत्र में तपस्या की थी, जिसके कारण यह क्षेत्र भृगु क्षेत्र के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
भृगु आश्रम और मंदिर आज भी इस धार्मिक परंपरा के प्रमुख केंद्र हैं। महर्षि भृगु के शिष्य दर्दर मुनि की परंपरा को बलिया के प्रसिद्ध ददरी मेले से भी जोड़ा जाता है। कॉरिडोर बनने के बाद विकसित परिसर, बेहतर प्रवेश व्यवस्था, चौड़े रास्ते, सुंदरीकरण और आधुनिक सुविधाओं से श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। इससे स्थानीय दुकानदारों, कारोबारियों और अन्य लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।