जलभराव अभियान और जांच
महापौर अशोक तिवारी ने बताया कि पिछले करीब एक सप्ताह से सोशल मीडिया पर एक अभियान चल रहा था। इसमें काशी में जलभराव, गलियों के जलमग्न होने की शिकायतें थीं। कई वार्डों में समस्याओं को लेकर लगातार वीडियो सामने आ रहे थे। सोशल मीडिया पर जहां-जहां शिकायतें और वीडियो मिले। वहां नगर निगम के अधिकारियों को भेजकर मौके की विस्तृत जांच कराई गई। जांच के दौरान कई स्थानों पर सीवर को कूड़े-करकट से ढका पाया गया। अन्य सामग्री से भी सीवर लाइनों को जानबूझकर बाधित किया गया था।
सीवर अवरोध और अवैध निर्माण
जांच में सामने आया कि कुछ स्थानों पर सीवर में बोरी भरकर डाली गई थी। कहीं-कहीं प्लाई डालकर सीवर को पूरी तरह ढक दिया गया था। महापौर ने नवेद कॉम्प्लेक्स का भी विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने इसे एक अवैध बिल्डिंग बताया है। इस कॉम्प्लेक्स के नीचे से एक बड़ा नाला गुजरता है। उस नाले के ऊपर ही यह अवैध निर्माण किया गया है। नालों और सीवर की वर्तमान स्थिति की गहन जांच कराई जा रही है।
वास्तविक कारणों की पड़ताल और समाधान
इस जांच का मुख्य उद्देश्य जलभराव के वास्तविक कारणों का पता लगाना है। सीसीटीवी के इस आधुनिक दौर में यह पता लगाया जा सकता है। सीवर में बोरी कब डाली गई और किसके द्वारा डाली गई। इसके पीछे क्या वजह थी, यह भी स्पष्ट हो जाएगा। अधिकारियों ने जांच के दौरान सीवर में बोरे और नाले में मलबा भरा देखा है।
महापौर ने स्पष्ट किया कि इन गतिविधियों के लिए कौन जिम्मेदार है। इसका अंतिम निर्णय जांच पूरी होने के बाद ही लिया जाएगा। नगर निगम और जलकल जलभराव की समस्या के समाधान के लिए लगातार काम कर रहे हैं। यदि जानबूझकर सीवर और नालों को बाधित किया गया है। तो यह नगर निगम, जलकल और काशी की जनता की छवि को नुकसान पहुंचाने वाली बात है।