पवित्र माना जाता है बार्न उल्लू
देश के विभिन्न भागों में बार्न उल्लू को पवित्र माना जाता है। स्वभाव से बार्न उल्लू शर्मीला और शांत होता है। इसकी आवाज सामान्य उल्लू के समान नहीं होती है। इसकी आवाज कर्कश होती है। यह कृषक मित्र होने की वजह से रात में खलिहान में रुकता है। अनाज खाने के लिए आने वाले जंतुओं का शिकार करता है।
यह खेत में लगी फसलों को कीट पंतग से भी बचाता है। इस प्रजाति के उल्लू अक्सर जोड़े में ही रहते हैं। यह सूखी जगह, पुराने मकानों में, घर और खंडहर, पुराने किलों में निवास करते हैं। ये पक्षी पीपल, बरगद, गूलर जैसे बड़े पेड़ों पर खोखले भाग में अपना निवास बनाते हैं। बार्न उल्लू रात्रिचर होते हैं।
इनका भोजन मुख्य रूप से चूहे होते हैं। प्रतिवर्ष चार से सात सफेद चिकने गोलाकार अंडे देते हैं। ऐसी स्थिति में नर ही भोजन का प्रबंध करता है और मादा अंडों को सुरक्षित रखने का कार्य करती है।
यह है विशेषता
बार्न उल्लू अब व्यापक रूप से पाया जाने वाला रात्रिचर उल्लू है। इसकी मुख्य विशेषता यह है कि अन्य प्रकार के उल्लुओं के बीच यह अंतर करता है। इसके लंबे पैर, लंबे ताल और छोटी आंखें हैं।