घटना के बाद धनंजय सिंह ने इस मामले में अभय सिंह के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई थी। पुलिस की विवेचना के दौरान अन्य आरोपियों के रूप में विनीत सिंह, संदीप सिंह, संजय सिंह रघुवंशी, विनोद सिंह और सतेंद्र सिंह के नाम भी सामने आए। इसके बाद सभी आरोपियों के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया गया था।
मामले की सुनवाई विशेष न्यायालय एमपी/एमएलए में चल रही थी, जहां दोनों पक्षों की बहस पहले ही पूरी हो चुकी थी। बुधवार को तय तिथि पर अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए साक्ष्यों के अभाव में सभी आरोपियों को बरी कर दिया।
फैसले के बाद आरोपियों की ओर से संतोष जताया गया। विनीत सिंह के अधिवक्ता वरुण प्रताप सिंह ने कहा कि उनके मुवक्किल के खिलाफ देश के किसी भी न्यायालय में कोई आपराधिक मामला लंबित नहीं है। वहीं, विधायक अभय सिंह ने भी खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि उन्हें राजनीतिक कारणों से फंसाया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि धनंजय सिंह ने ही उन्हें इस मामले में झूठा फंसाया था।
करीब दो दशक पुराने इस बहुचर्चित मामले में आए फैसले के बाद एक लंबे समय से चल रही कानूनी प्रक्रिया का अंत हो गया। अदालत के इस निर्णय को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है।