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Dhananjay Singh Case: बड़ा फैसला...सभी आरोपी दोषमुक्त करार, विधायक अभय बोले- धनंजय खुद अपराधी है; गरमाई सियासत

Wed, 15 Apr 2026 01:26 PM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: वाराणसी जिले में पूर्व सांसद धनंजय सिंह पर हमले के मामले में कोर्ट ने बुधवार को बड़ा फैसला सुनाया। इसे लेकर कचहरी परिसर में कड़ी  सुरक्षा व्यवस्था की गई है। 
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पूर्व सांसद धनंजय सिंह - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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वाराणसी के नदेसर स्थित टकसाल सिनेमा के पास वर्ष 2002 में हुए चर्चित फायरिंग मामले में अदालत ने बुधवार को बड़ा फैसला सुनाया। पूर्व सांसद धनंजय सिंह पर जानलेवा हमले के इस प्रकरण में विशेष न्यायालय एमपी/एमएलए के न्यायाधीश यजुवेंद्र विक्रम सिंह ने सभी आरोपियों को दोषमुक्त करार दिया। फैसले के मद्देनजर कचहरी परिसर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी।

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यह मामला चार अक्तूबर 2002 का है। अभियोजन के अनुसार, उस समय जौनपुर से जुड़े तत्कालीन विधायक और पूर्व सांसद धनंजय सिंह अपने साथियों के साथ चार पहिया वाहन से लौट रहे थे। जब उनका काफिला वाराणसी के कैंट थाना क्षेत्र अंतर्गत नदेसर स्थित टकसाल सिनेमा हॉल के पास पहुंचा, तभी बोलेरो से उतरे गोसाईगंज (वर्तमान में अयोध्या) के विधायक अभय सिंह और उनके साथियों ने कथित रूप से अंधाधुंध फायरिंग कर दी। इस हमले में धनंजय सिंह, उनके गनर, चालक सहित कई लोग घायल हो गए थे।

घटना के बाद धनंजय सिंह ने इस मामले में अभय सिंह के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई थी। पुलिस की विवेचना के दौरान अन्य आरोपियों के रूप में विनीत सिंह, संदीप सिंह, संजय सिंह रघुवंशी, विनोद सिंह और सतेंद्र सिंह के नाम भी सामने आए। इसके बाद सभी आरोपियों के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया गया था।

मामले की सुनवाई विशेष न्यायालय एमपी/एमएलए में चल रही थी, जहां दोनों पक्षों की बहस पहले ही पूरी हो चुकी थी। बुधवार को तय तिथि पर अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए साक्ष्यों के अभाव में सभी आरोपियों को बरी कर दिया।
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फैसले के बाद आरोपियों की ओर से संतोष जताया गया। विनीत सिंह के अधिवक्ता वरुण प्रताप सिंह ने कहा कि उनके मुवक्किल के खिलाफ देश के किसी भी न्यायालय में कोई आपराधिक मामला लंबित नहीं है। वहीं, विधायक अभय सिंह ने भी खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि उन्हें राजनीतिक कारणों से फंसाया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि धनंजय सिंह ने ही उन्हें इस मामले में झूठा फंसाया था।



करीब दो दशक पुराने इस बहुचर्चित मामले में आए फैसले के बाद एक लंबे समय से चल रही कानूनी प्रक्रिया का अंत हो गया। अदालत के इस निर्णय को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है।
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