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काशी में इसरो के पूर्व अध्यक्ष: बोले- चंद्रयान सीरीज ने सिखाया, लक्ष्य पर समय से न पहुंचना असफलता नहीं

Fri, 11 Sep 2026 04:37 PM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

डीपीएस वाराणसी में इसरो के पूर्व अध्यक्ष एएस किरण कुमार पहुंचे। उन्होंने कहा कि प्रकृति में तकनीक का रहस्य छिपा है। बताया कि उल्लू को देख नाइट विजन हाईटेक कैमरे और चमगादड़ को देख रडार तकनीक बनी।
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कार्यक्रम में मौजूद अतिथि - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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डीपीएस वाराणसी में बृहस्पतिवार को इसरो के पूर्व अध्यक्ष एएस किरण कुमार पहुंचे। बच्चों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि प्रकृति से सीख लेकर ही तकनीक ने विकास किया। उल्लू को देख हाईटेक नाइट विजन कैमरे ईजाद किए गए और चमगादड़ की प्रतिध्वनि से सीख लेकर मनुष्यों ने रडार जैसी तकनीक विकसित की। 

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उन्होंने कहा कि चंद्रयान-2 से मिली सीख को आत्मसात करते हुए चंद्रयान-3 को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में सफल सॉफ्ट लैंडिंग कराना एक ऐतिहासिक उपलब्धि थी। उन्होंने कहा कि इस मिशन का सबक यही था कि किसी लक्ष्य का समय पर पूरा न होना असफलता नहीं है, बल्कि नई संभावनाओं और नई दिशा की शुरुआत वहीं से होती है। आपको प्रश्न पूछने, कल्पना करने, प्रयोग करने और नई तकनीकों के निर्माण का साहस खुद में रखना होगा।

क्लासरूम ही आपका लॉन्च पैड
एएस किरण कुमार ने कहा कि क्लासरूम ही आपका लॉन्चपैड है। पढ़ाई सिर्फ परीक्षा की तैयारी करने के लिए नहीं की जाती, बल्कि सार्थक प्रश्न पूछने, स्वतंत्र चिंतन, समस्याओं का समाधान खोजने और समाज के प्रति उत्तरदायी बनने की क्षमता विकसित करने के लिए की जाती है। इस दौरान उन्होंने विद्यार्थियों से प्रश्न किया कि 2047 में भारत को विश्व में किस स्थान पर होना चाहिए? उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे अपनी पूर्ण क्षमता को पहचानें। ज्ञान, कौशल, परिश्रम और प्रतिबद्धता के साथ भारत को विश्व का अग्रणी राष्ट्र बनाने में अपना योगदान दें। बच्चों ने उपग्रहों, मौसम पूर्वानुमान, अंतरिक्ष तकनीक से वैज्ञानिक विषयों से जुड़े प्रश्न पूछे।

अंतरिक्ष विज्ञान सिर्फ रॉकेट प्रक्षेपण तक सीमित नहीं है
एएस किरण कुमार ने विद्यार्थियों को उपग्रह आधारित नेविगेशन प्रणाली (नाविक), मौसम विज्ञान, अंतरिक्ष अनुसंधान, नई खोजों और उनसे जुड़ी वैज्ञानिक चुनौतियों के बारे में जानकारियां दीं। उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष विज्ञान केवल रॉकेट प्रक्षेपण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे अत्याधुनिक तकनीक, निरंतर शोध, सटीक गणना, परीक्षण और वैज्ञानिकों की वर्षों की मेहनत जुड़ी होती है। इस दौरान एएमटीसी के विजेता छात्रों को उन्होंने मेडल दिया। संचालन श्रेया प्रसाद व शांभवी झा ने किया। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि टेक्नोक्रेट विनीत गोयनका रहे। निदेशक सिद्धार्थ राजगढ़िया ने स्वागत किया। प्रधानाचार्य मुनमुन सेनगुप्ता, एकेडमिक हेड रोली मानखंड भी मौजूद रहीं। निदेशक सिद्धार्थ राजगढ़िया ने एएस किरण कुमार के साथ एक पॉडकॉस्ट एपिसोड भी शूट किया।
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किरण कुमार चार दशक तक इसरो से जुड़े रहे
किरण कुमार चार दशक से भी ज्यादा समय तक इसरो से जुड़े रहे। 2015 से 2018 तक अध्यक्ष और अंतरिक्ष विभाग के सचिव के पद पर रहे। चंद्रयान-1, मंगलयान, इनसैट -3डी, कार्टोसैट, रिसोर्ससैट और नाविक जैसे कई मिशन में नेतृत्व और योगदान दिया। 2014 में उन्हें पद्मश्री मिला। उन्हें फ्रांस का सर्वोच्च नागरिक सम्मान, अंतरराष्ट्रीय वॉन कार्मान विंग्स पुरस्कार, एचके फिरोदिया विज्ञान रत्न पुरस्कार और इसरो लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड भी मिल चुका है।
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