इसी सिलसिले में सेवानिवृत्त आईपीएस ने अदालत में आकर बयान दर्ज कराया है। पूर्व डीजीपी ने कहा कि 19 मई 1986 से 30 अगस्त 1987 तक वह गाजीपुर में एसपी रहे हैं। मुख्तार अंसारी के शस्त्र लाइसेंस के आवेदन पत्र व सत्यापन रिपोर्ट पर कूटरचित हस्ताक्षर बनाए गए हैं। उन्होंने मुख्तार अंसारी के शस्त्र लाइसेंस के आवेदन पत्र की न संस्तुति की थी और न उस पर हस्ताक्षर किए थे। इस संबंध में सीबीसीआईडी ने वर्ष 1994 में उनका बयान भी दर्ज किया था। तभी मामले की जानकारी हो सकी थी।
इसके बाद पूरे मामले की जानकारी ली। तब पता चला कि शस्त्र लाइसेंस के आवेदन पत्र पर जो हस्ताक्षर बनाए गए हैं, वह उनके हस्ताक्षर से मेल नहीं खाते हैं। यह जानकारी भी नहीं है कि आवेदन पत्र पर किसने हस्ताक्षर किया था? गवाह का बयान दर्ज होने के बाद जिरह की कार्रवाई भी पूरी कर ली गई। मामले में शासन के आदेश पर सीबीसीआईडी ने जांच के बाद मुकदमा दर्ज किया था। 8 अगस्त 1994 को सीबीसीआईडी के विवेचक ने पूर्व डीजीपी देवराज नागर का बयान दर्ज किया था, तब उन्हें प्रकरण की जानकारी हुई थी।