मजिस्ट्रेट ने प्रार्थना पत्र यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि महबूबा मुफ्ती लोकसेवक हैं और उन पर मुकदमे के पूर्व राज्य की अनुमति आवश्यक है। इसके खिलाफ पुनरीक्षण याचिका दाखिल की गई। दलील दी गई कि कोर्ट में आरोप पत्र लगने के दौरान सरकार से पूर्व स्वीकृति आवश्यक है, 156 (3) की दरखास्त या एफआईआर के लिए नहीं। इस पर जिला जज ने बहस सुनने के बाद पुनरीक्षण प्रार्थना पत्र स्वीकार कर महबूबा मुफ्ती को नोटिस जारी की। राज्य सरकार को भी मामले में पक्षकार बनाया गया है।
दरअसल, महबूबा मुफ्ती ने तिरंगे को ना उठाने की बात कही थी। महबूबा ने कहा था कि हम अनुच्छेद 370 को वापस लेकर रहेंगे। जब तक ऐसा नहीं हो जाता है, मैं कोई भी चुनाव नहीं लडूंगी। जिस समय हमारा ये झंडा (कश्मीर का झंडा) वापस आएगा, हम उस (तिरंगा) झंडे को भी उठा लेंगे। जब तक हमारा झंडा वापस नहीं आता, तब तक हम किसी और झंडे को हाथ में नहीं उठाएंगे।