बलिया सहित पूर्वांचल में है अधिक असंतुलन
डॉ पाठक के अनुसार बलिया सहित पूर्वांचल के जिलों में पर्यावरण की स्थिति बेहद असंतुलित है। सोनभद्र, मिर्जापुर एवं चंदौली जिलों को छोड़ दिया जाए तो शेष सात जिलों आजमगढ़, मऊ, बलिया, जौनपुर, गाजीपुर, चंदौली, वाराणसी एवं संतरविदासनगर में कुल भूमि के क्रमशः 0.03, 0.33, 0.01, 0.02, 0.04, 0.00, 0.16, प्रतिशत भूमि पर ही वन क्षेत्र हैं। जबकि पारिस्थितिकीय संतुलन के लिए कुल भूमि के 33 प्रतिशत भूमि पर वन क्षेत्र आवश्यक है।
ऐसे में अब पर्यावरण एवं पारिस्थितिकीय असंतुलित को बचाए रखने के लिए एक मात्र उपाय वनों की रक्षा या अधिक से अधिक पेड़ लगाना ही है। पूर्वांचल के सात जिलों आजमगढ़, मऊ, बलिया, गाजीपुर, जौनपुर, वाराणसी एवं संतरविदासनगर में एक प्रतिशत से भी कम वन हैं। डॉ पाठक कहते हैं कि अब केवल सरकार के भरोसे वृक्षारोपण के लक्ष्य को नहीं पाया जा सकता। इसमें जन-जन को अपनी सहभागिता निभानी होगी।