मियावाकी वन
गाजीपुर में ही मियावाकी पद्धति पर वन तैयार किया जा रहा है। जहां देशी पौधों से घने जंगल बनाए जाएंगे। इसमें वो सभी पौधे लगाए जाएंगे जो किसान और आमजन मानस के लिए बहुत ही उपयोगी होते हैं। इस विधि से कम समय में ही घने, देशी और जैव विविध वन बनाया जा सकता है। इसमें करीब 17 हजार से अधिक पौधे वन विभाग लगाएगा। इस पद्धति से पेड़ 10 गुना तेजी से बढ़ते हैं।
अमृत धारा वन
ये वन गंगा और उनके सहायक नदी गोमती, अस्सी, वरुणा और सई नदियों के किनारों पर लगाए जाएगा। जिनमें कदम, अर्जुन, गुड़हल, चीलबील, कंजी, जामुन आदि पौधे लगाए जाएंगे। इनके लगने से नदियों के किनारे होने वाली कटान पर रोक लगेगी। साथ ही वन्य जीवों को भी फायदा होगा। नदियों के किनारे वन होने से पर्यटकों की संख्या में भी बढ़ोतरी होगी।
विरासत वृक्ष वाटिका
वाराणसी के छहनीधी और गद्दोपुर क्षेत्र में 5.5 हेक्टेयर भूमि पर प्रदेश के ऐतिहासिक, पौराणिक और धार्मिक महत्व वाले 948 हेरिटेज वृक्षों को लगाया जा रहा है। इसके तैयार हो जाने से पर्यटकों को काफी फायदा होगा। पर्यटक एक स्थान पर ही 948 हेरिटेज वृक्ष देख सकते हैं और उन वृक्षों को वन विभाग सुरक्षित रख सकेगा।
नगर वन वाटिका
सारनाथ में 2 हेक्टेयर भूमि में पर नगर वन वाटिका तैयार की गई है। जिसमें 88 हजार के करीब पौधे लगाए गए है। इस वाटिका को तीन वाटिका के रूप में बांटा गया है। पहला शिव वाटिका है, जिसमें भगवान शिव से जुड़े हुए पौधे लगाए गए है। दूसरा बुद्ध वाटिका है, जिसमें भगवान बुद्ध से जुड़े हुए पौधे लगाए गए है। तीसरा नगरी वाटिका है, जिसमें फलदार और छायादार समेत कई प्रजाति के पौधे लगाए गए हैं।
बोले अधिकारी
गाजीपुर, जौनपुर और वाराणसी में वनों की वाटिका बना रही है। कुछ वाटिका में पौधे लगा दिये गए हैं तो कुछ में लगाए जाने हैं। इससे लोगों को स्वच्छ हवा और हरियाली देखने को मिलेगी। - डॉ. रवि कुमार सिंह, वन सरंक्षक, वाराणसी मंडल