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काशी में विदेश मंत्री बोले: मंदिर हमारी परंपराओं की पहचान, आज भी संस्कारों से जुड़ा है हिंदू समाज

Sun, 11 Dec 2022 08:04 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

वाराणसी के दो दिवसीय दौरे पर केंद्रीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रविवार को काशी विद्वत परिषद की ओर से श्री काशी विश्वनाथ धाम के त्रयंबक हॉल में आयोजित संगोष्ठी को संबोधित किया। 
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काशी विश्वनाथ कॉरिडोर में विदेश मंत्री एस. जयशंकर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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केंद्रीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि हमारे मंदिरों का योगदान समाज को जोड़ना है। काशी और तमिल के मंदिरों की देन है कि आज भी हिंदू समाज अपने संस्कारों से जुड़ा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसलिए इस तरह की योजना बनाई है कि हम सब एक होकर राष्ट्रीय भावना को बढ़ावा दें और मंदिर हमारी परंपराओं की पहचान बनी रहे।

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विदेश मंत्री रविवार को काशी तमिल संगमम के तहत काशी विद्वत परिषद की ओर से श्री काशी विश्वनाथ धाम के त्रयंबक हॉल में आयोजित संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। समाज एवं राष्ट्र के निर्माण में मंदिरों का योगदान विषयक गोष्ठी को संबोधित करते हुए काशी विद्वत परिषद के महामंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी ने कहा कि मंदिर समरसता के प्रतीक हैं।

काशी तमिल संगमम ने समाज में एक नया विश्वास खड़ा किया

भारत के प्रधानमंत्री की देन है कि आज हमारे मंदिरों को संवारने का काम हो रहा है।  तमिलनाडु के एम नाचियप्पन ने कहा कि भारत में मंदिरों ने समाज को जोड़ने का काम किया है। काशी विद्वत परिषद के अध्यक्ष पद्मभूषण प्रो. वशिष्ठ त्रिपाठी ने कहा कि काशी तमिल संगमम ने समाज में एक नया विश्वास खड़ा किया है। पी चेल्लापांडियन् ने भी मंदिरों के अवदान और समाज को जोड़ने की परंपरा पर विचार प्रकट किया।

विदेश मंत्री ने महाकवि सुब्रमण्यम भारती के परिजनों से की मुलाकात

महाकवि सुब्रमण्यम भारती के भांजे केवी कृष्णन और परिजनों संग विदेश मंत्री - फोटो : अमर उजाला
केंद्रीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रविवार को महाकवि सुब्रमण्यम भारती के भांजे केवी कृष्णन और परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने कहा, महाकवि का जीवन, विचार और लेखन आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करता रहेगा। हनुमान घाट पहुंचे विदेश मंत्री ने कहा कि यह घर एक ज्ञान केंद्र और पावन तीर्थ है।
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सामाजिक न्याय और महिला सशक्तीकरण पर सुब्रह्मण्यम भारती की रचनाएं आज भी प्रासंगिक हैं। काशी में ही महाकवि भारती का परिचय अध्यात्म और राष्ट्रवाद से हुआ। विदेश मंत्री ने उनके भांजे केवी कृष्णनन को अंगवस्त्रम देकर सम्मानित कर उनका कुशलक्षेम जाना। महाकवि के परिजनों में जयंती, हेमा, रवि और संतोष से मिलकर ख़ुशी जताई और उनका हाल जाना। कुछ देर तक आंगन में महाकवि के स्मृति चिह्न को भी देखा। इस दौरान मंडलायुक्त कौशल राज शर्मा भी मौजूद रहे।
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