वाराणसी। कबीर चौरा स्थित मूलगादी परिसर में संत कबीर के 617वें प्राकट्य महोत्सव का आगाज सोमवार की सुबह बीजक पाठ से हुआ। इसी के साथ कबीरपंथियों की भीड़ मूलगादी परिसर स्थित प्रतिमाओं के दर्शन के साथ ही भजनों पर थिरकने लगी।
इसके बाद हुई परिचर्चा में संत कबीर के व्यक्तित्व पर रोशनी डाली गई। इस दौरान आचार्य विवेक दास की पुस्तक ‘स्वाधीनता संघर्ष में कबीर मठ का योगदान’ का विमोचन किया गया।
मूलगादी परिसर में हुई परिचर्चा में आचार्य विवेक दास ने कहा कि संत कबीर ने दुनिया को पाखंड के मकड़जाल से बाहर निकलने का रास्ता दिखाया है।
समाज को अंधविश्वास, कर्मकांड से मुक्ति दिलाने के लिए उनके संदेशों की प्रासंगिकता अब पूरे विश्व में महसूस की जा रही है। उन्होंने कहा कि कबीर को अब समझने के लिए दुनिया बेताब है। उन्होंने बताया कि कबीर के अनुयायी पाखंड में विश्वास नहीं करते। समाज में बेहतर शिक्षा और स्वास्थ की जरूरत है।
इसके लिए सारनाथ में कबीर विद्यापीठ और शिवपुर में संत के नाम पर अस्पताल खोला जाएगा। इस मौके पर प्रो. दीपक मलिक, प्रो. सुरेंद्र प्रताप सिंह, विजय शंकर पांडेय के अलावा तमाम लोग उपस्थित थे।
मंगलवार की शाम संगीत समारोह में प्रशस्ति तिवारी कबीर के पदों पर कथक नृत्य पेश करेंगी। इनके बाद मोहन लाल मिश्र का गायन होगा। फिर दीपक सहाय, किशोर मिश्र और श्याम कुमार मिश्र तबले पर त्रिबंदी पेश करेंगे।