महोत्सव के दौरान मंचासीन अतिथिजन।
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सदगुरु कबीर साहब के 626वें प्राकट्य महोत्सव के तीन दिनी कार्यक्रम के दूसरे दिन और योग दिवस के अवसर पर योगासन का कार्यक्रम संपन्न हुआ। दोपहर एवं शाम को भजन प्रवचन का आयोजन हुआ।
मुख्य अतिथि प्राचीन वाल्मीकि मंदिर (दिल्ली) के स्वामी विवेक नाथ जी महाराज ने कहा कि कबीर साहब का मार्ग काफी सरल है। उनके रास्ते पर चलना बहुत कठिन भी है। कबीर कहते हैं कि कबीरा खड़ा बाजार में लिए लुकाठी हाट। जो घर जारों अपने चले हमारे साथ।
प्राचीन कबीर प्राकट्य स्थल के महंत गोविंद शास्त्री महाराज ने कहा कि कबीर साहब अपनी छोटी-छोटी साखी के माध्यम से जीवन को मुक्ति की बात बताते हैं। कबीर साहब कहते हैं कि
सांच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप। जाके हृदय सांच है, ताके हृदय आप।
कहा कि यदि हम सत्य के रास्ते पर चलते हैं तो मनुष्य की मुक्ति का रास्ता बन जाता है। इस कार्यक्रम में राजस्थान के रामरसायन महराज, बिहार के ज्ञान स्वरूप तपस्वी महाराज, दिल्ली के डॉक्टर रविंद्र कुमार, दिनेश दास, दयाल दास, प्रह्लाद आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए।