असि और वरुणा के उद्धार के लिए एनजीटी के आदेश का पालन अभी तक धरातल पर नहीं उतर सका है। आदेश के छह महीने बाद भी स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है। इस मामले में कानूनी लड़ाई लड़ने वाले उच्च न्यायालय के अधिवक्ता सौरभ तिवारी ने बुधवार को मंडलायुक्त और जिलाधिकारी को पत्र लिखकर एनीजीटी के आदेशों का पालन करवाने का अनुरोध किया है।
मंडलायुक्त और डीएम को लिखे गए पत्र में सौरभ तिवारी ने कहा है कि न्यायपालिका के आदेश का पालन व जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन कार्यपालिका का दायित्व है। एनजीटी के आदेश में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में क्रियान्वयन समिति व मंडलायुक्त की अगुवाई में पर्यवेक्षण समिति गठित करने का आदेश दिया गया था। क्रियान्वयन समिति की महीने में कम से कम एक बार बैठक और पर्यवेक्षण समिति को हर तीन महीने पर समीक्षा बैठक आयोजित करने का निर्देश दिया गया था। बैठक की जानकारी को वेबसाइट पर अपलोड करने व एक-एक पर्यावरणविद की नियुक्ति करने का आदेश दिया गया था। असि व वरुणा नदी के तल से गाद की सफाई व दोनों नदियों से अतिक्रमण हटाकर पिलर द्वारा सीमा तय करने का आदेश था। इसके साथ ही नदी के मुहाने से कुछ किलोमीटर तक जैव विविधता पार्क भी बनाना था।
एनजीटी ने स्वतंत्र जांच समिति गठित की थी और समिति ने 230 पृष्ठों की रिपोर्ट एनजीटी को सौंपी थी। 230 पृष्ठों की रिपोर्ट के पश्चात न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने असि व वरुणा नदी के पुनर्स्थापन के लिए 40 पृष्ठों का विस्तृत आदेश पारित किया गया था। अधिवक्ता सौरभ तिवारी ने बताया कि एनजीटी के आदेश के बाद भी जमीनी स्तर पर कुछ नहीं हुआ है। अगर असि व वरुणा नदी को पुनर्जीवित करने के लिए एनजीटी के आदेश का पालन नहीं हुआ तो वह जिम्मेदारों के खिलाफ न्यायालय में अवमानना याचिका दायर करेंगे।