अलग-अलग शैलियों में कजरी के बोल
- सुमिरन : कहंवा से आवेलू माता भवानी अरे, कहंवा से आवईं महावीर से संवरिया।
- चौलर : जसुदा कहें नंद से हंसि के, परि पइयां हो गोसईयां, हरि मोरे रेंगईं बेकईयां ना
- डुनमुनिया : कहां धरू झुलनी उतारि बारी धनियां, मगिहंई तोहरा सजनवा ना
- झूला : पटरा बंद कर हो बनवारी हम घर मारी हो जइबई ना
कजरी में लोगों की रुचि बढ़ रही है। गांवों के साथ ही शहरों में भी लोग कजरी को पसंद करते हैं। सावन में कलाकारों को महानगरों से बुलावा आता है। इंटरनेट के माध्यम से हमारी पहुंच बढ़ी है। जौनपुर में प्रमुख रूप से चौलर, डुनमुनिया और उठान कजरी गाई जाती है। - लालबहादुर यादव, कजरी कलाकार
अच्छी बात है कि लोग इस प्रकार के कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में स्वयं से उपस्थित होते हैं। पूरा प्रयास है कि यह गायन विधा एक बार फिर से अपने चरम पर पहुंचे। कजरी अब जिला ही नहीं, प्रदेश व देश छोड़कर विदेश तक अपनी पहचान बना चुकी है। - उर्मिला श्रीवास्तव, पद्मश्री
पहले संचार के साधन कम थे। सावन में ससुराल गईं बेटियों के लिए मां-बाप के सीने में हूक उठती है। अब डिजिटल दौर ने हमारे सीने से वो हूक निकाल दी। हम करीब होकर भी बहुत दूर हो गए। परंपराएं फिर से खिल जाएं तो खुशी हो। - डॉ. मनोज मिश्रा, विभागाध्यक्ष, जनसंचार विभाग पूविवि जौनपुर