जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने गंगा और वरुणा के जलस्तर व प्रवाह की लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जलस्तर में होने वाले प्रत्येक बदलाव की नियमित समीक्षा कर संबंधित अधिकारियों और नियंत्रण कक्ष को तत्काल जानकारी दी जाए। संभावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पहले से चिन्हित राहत शिविर, पहुंच मार्ग, प्रकाश व्यवस्था, पेयजल, स्वच्छता और राहत-बचाव के संसाधन सक्रिय स्थिति में रखे जाएं, ताकि जरूरत पड़ने पर प्रभावित परिवारों को बिना देरी सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके।
पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने पुलिस और जल पुलिस के अधिकारियों को नदी और तटवर्ती इलाकों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए। संवेदनशील स्थानों पर पुलिस बल और जल पुलिस की प्रभावी मौजूदगी सुनिश्चित करने के साथ जरूरत पड़ने पर तत्काल रेस्क्यू और सुरक्षित निकासी की व्यवस्था करने को कहा। उन्होंने नदी किनारे और निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को लगातार जागरूक करने के भी निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान एनडीआरएफ और जल पुलिस की नावें तैनात रहीं। अधिकारियों ने पुलिस, प्रशासन, एनडीआरएफ और अन्य विभागों के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने पर जोर दिया। सभी संसाधनों और मानवबल को पहले से तैयार रखने के निर्देश दिए गए, ताकि आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई की जा सके।
डीएम ने तहसीलदार सदर और संबंधित अधिकारियों को वरुणा नदी के तटवर्ती आबादी वाले क्षेत्रों में घर-घर जाकर जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए। नागरिकों से प्रशासन की अधिकृत सूचनाओं पर भरोसा करने और अफवाहों से बचने की अपील की गई।
निरीक्षण के दौरान अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) डॉ. सदानन्द गुप्ता, तहसीलदार सदर, एनडीआरएफ के डिप्टी कमांडेंट, जल पुलिस के अधिकारी तथा पुलिस और प्रशासन के संबंधित अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।