चारों तरफ बजबजाते कीचड़ और दूषित खानपान के चलते चोलापुर ब्लॉक के लश्करपुर गांव की मुसहर बस्ती में डायरिया फैल गया है। संक्रमण के चलते पिछले 20 दिनों में पांच लोगों की मौत हो चुकी है। चार बच्चों की मौत के बाद शुक्रवार को 55 साल की महिला सुदामा भी डायरिया की भेंट चढ़ गई। मरने वाले सभी लोग पूर्व ग्राम प्रधान मिठाई लाल के परिवार के सदस्य थे। अभी भी गांव में कई लोग बीमार हैं। वहीं, महिला की मौत की खबर पाकर चोलापुर सीएचसी की टीम ने गांव में पहुंचकर ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कराया और ओआरएस बांटकर लौट गई। स्वास्थ्य विभाग इसे फूड प्वाइजनिंग मान रहा है।
लश्करपुर की मुसहर बस्ती में तीन हफ्ते पहले पूर्व प्रधान मिठाई लाल के नाती पवन (2) को उल्टी-दस्त की शिकायत हुई। मिठाई लाल ने बताया कि दो-तीन दिन तक पवन का घरेलू उपचार किया गया लेकिन आठ जुलाई को उसकी मौत हो गई। इसके कुछ दिन बाद परिवार के दूसरे बच्चे भी उल्टी-दस्त करने लगे। लोगों ने आसपास के झोलाझाप डॉक्टरों से उपचार कराया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। इसके बाद एक-एक कर तीन बच्चों की जान चली गई। 22 मई को मिठाई लाल की पुत्री मुरारी की 11 साल की बेटी गीता, 25 को दूसरे नाती छोटू (ढाई साल) और 26 जुलाई को पोती झुमकी (3) की मौत हो गई। इसी बीच मिठाई लाल के छोटे भाई पुद्दन की पत्नी सुदामा (55) भी बीमार हो गई। ग्राम प्रधान तेज बहादुर ने 108 नंबर एंबुलेंस बुलाकर सुदामा को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चोलापुर भेजवाया लेकिन घर वाले अगले ही दिन उसे अस्पताल से घर ले आए और शुक्रवार को उसकी भी मौत हो गई। बस्ती के एक ही परिवार में पांच मौतें होने से कोहराम मचा हुआ है। वहीं, बबलू का बेटा दिलीप (8), राजेश की बेटी आरती (1) के अलावा चिंटू और पिंटू समेत चार बच्चे बीमार हैं।
वहीं, महिला की मौत की जानकारी मिलने पर दोपहर में डॉ. दीन मोहम्मद के नेतृत्व में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की टीम पहुंची। चिकित्सकों ने बस्ती में ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कराया और सभी परिवारों में ओआरएस के पैकेट वितरित किए। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. आरबी यादव का कहना है कि यह डायरिया नहीं बल्कि फूड प्वाइजनिंग हुई है। बस्ती के लोग सड़ा-गला मांस खाने की वजह से बीमार हुए हैं।