उत्तर प्रदेश के जौनपुर में शुक्रवार की देर रात हुए सड़क हादसे ने कई परिवारों को खुशियां छीन ली। सभी लोग हंसी-खुशी घर से सावन की सप्तमी पर शीतला चौकिया में दर्शन-पूजन करने के लिए रवाना हुए थे, लेकिन किसी को क्या पता था रास्ते में ही काल के गाल में समा जाएंगे। हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के लिए परिवारों वालों की हालत देखकर किसी के भी आंसू छलक जाएंगे। आगे की स्लाइड्स में देखें....
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- फोटो : अमर उजाला
वाराणसी के चोलापुर, सारनाथ, फूलपुर थाना क्षेत्र के अलग-अलग गांवों से लोग सावन की सप्तमी पर शीतला चौकिया में दर्शन-पूजन कर कौशांबी जिले में स्थित कड़े मानिक धाम जा रहे थे। वाराणसी के अलग-अलग गांवों के सभी दर्शनार्थी एक बस और दो बोलेरो में सवार होकर दर्शन पूजन के लिए निकले थे।
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रात में करीब दो बजे जौनपुर-रायबरेली हाइवे पर मछलीशहर कोतवाली से आगे निकामुद्दीनपुर गांव सबसे पीछे चल रही बोलेरो सड़क किनारे पहले से खड़े ट्रेलर के पीछे से भिड़ गई। हादसे में जयप्रकाश (35), सरिता देवी (33), मनोज पटेल (28), सुशीला (34) और शर्मिला (22) की मौत हो गई। वहीं वीरेंद्र पटेल (40), प्रेमशीला (38), प्रमिला (32), खुशी (16), साक्षी (7), करिशमा (2) व मोहन (42) घायल हो गए।
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Accident
सड़क हादसे में फूलपुर थानाक्षेत्र के ठाकुर वीर के रहने वाले कमला पटेल की दो पुत्रियां सुशीला और शर्मिला काल के गाल में समा गई। मनौती पूरी होने के बाद दर्शन के लिए बड़ी बेटी सुशीला मुंबई से मायके आई थी। कड़ा मानिकपुर जाने को छोटी बहन शर्मिला भी तैयार हो गई। घर पर मौजूद कमला पटेल की पत्नी धनपत्ती देवी ने बताया कि उसकी बड़ी बेटी सुशीला देवी ने अपनी लड़की खुशी की मनौती मानी थी। कड़ा मानिकपुर दर्शन करने जाने के लिए ही वह मुंबई से मायके आई थी।
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जब वह जाने को तैयार हुई तो सबसे छोटी बहन शर्मिला भी साथ जाने की जिद करने लगी। परिजन बाबतपुर तक दोनों बेटियों को छोड़ने गए पर क्या पता था कि यह दोनों बेटियों की अंतिम विदाई होगी। कमला पटेल को दो लड़के व चार लड़कियों में सुशीला सबसे बड़ी थी। जबकि शर्मिला सबसे छोटी थी। घऱ पर परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है।
सारनाथ के शिवपुरवा (अकथा) के मूल निवासी मनोज की शादी 21 नवंबर 2016 को बाबतपुर जेनगरपुर की सुशीला के साथ हुई थी। उसकी आठ माह की एक लड़की भी है। मनोज, स्टील की रेलिंग का काम करता था। तीन भाई, दो बहनों में सबसे बड़ा था। घर की संपूर्ण जिम्मेदारी इसी के कंधों पर थी। मां लीलावती देवी और पत्नी का रो-रो कर बुरा हाल है। दोनों रह रहकर बेसुध हो जा रही हैं।