डॉ. वंदना झा के अनुसार, पांच शोध पीठ स्थापित करने की योजना है, इससे छात्र-छात्राओं को मैथिली संस्कृति के साथ ही महापुरुषों की जीवनी के बारे में जानने का मौका मिलेगा। कला संकाय परिसर में अभिनव भवन जहां भारत अध्ययन केंद्र चल रहा था, वहीं मैथिली अध्ययन केंद्र संचालित होगा। अब पाठयक्रम तैयार करने की दिशा में कार्रवाई चल रही है।
विश्वविद्यालयों से जल्द होगा समझौता
मैथिली अध्ययन केंद्र में डिग्री, डिप्लोमा कोर्स के साथ ही शोध कार्यों और पांडुलिपियों, मधुबनी पेंटिंग सहित अन्य सामग्रियों के यहां अध्ययन के लिए मंगाए जाने आदि विषयों को लेकर जल्द ही जर्मनी, कनाडा, जापान देश-विदेश के अन्य विश्वविद्यालयों से समझौता भी किया जाएगा।
सह समन्वयक डॉ. वंदना झा ने बताया कि अभी कला संकाय की संकाय स्तर की पाठयक्रम समिति में पाठ्यक्रमों पर चर्चा के बाद आगे इस दिशा में काम किया जाएगा। एक साल (दो सेमेस्टर) का डिप्लोमा, सर्टिफिकेट कोर्स होगा। इसके अलावा समय-समय पर कार्यशालाओं का भी आयोजन किया जाएगा।