तूलिका से तप, रंगों में साधना की रम्यता से गुरु गोरखनाथ का दिव्य प्रतिरूप जीवंत हो उठा। नाथ परंपरा का निनाद और रंग-रेखाओं में सभी ने अध्यात्म के प्रसाद को महसूस किया। रामछाटपार शिल्प न्यास इंडिया सामने घाट स्थित ईशी आर्ट गैलरी की चित्र प्रदर्शनी में ऐसी प्रतीत हो रहा है मानो कला दीर्घा की नीरव दीवारें धर्म, योग और अध्यात्म की चेतना से अनुप्राणित होकर स्वयं बोल उठी हों।
मंगलवार को गोरक्षपीठ के पीठाधीश्वर योगी राजराजेश्वर गुरु गोरखनाथ का जीवन-दर्शन और उनकी कठोर साधना पर आधारित चित्र प्रदर्शनी लगाई गई। पांच दिवसीय प्रदर्शनी का उद्घाटन बीएचयू के पूर्व प्रो. संतोष सिंह ने किया। चित्रकार डॉ. अवनि शाह ने बताया कि यह उनकी 55वीं एकल (सोलो) प्रदर्शनी है। प्रदर्शनी की मुख्य थीम ऊं श्री शिव गोरक्षनाथ है। गुजरात की चित्रकार डॉ. अवनि शाह ने अपनी सधी हुई तूलिका से गुरु गोरखनाथ के महान जीवन को रंगों के माध्यम से ऐसा स्वरूप दिया है, जिसमें नाथ योग का तेज, वैराग्य का वैभव और साधना की गंभीरता एक साथ झलकती है। कुल 48 चित्रों की इस प्रदर्शनी में कुछ अन्य कृतियां कलाकार की सृजनात्मक कल्पना से उपजी हैं, जो आध्यात्मिक भाव भूमि को और भी विस्तार देती हैं। प्रदर्शनी 20 दिसंबर तक खुली रहेगी। उद्घाटन अवसर पर प्रो. मदनलाल, मंजुला बेन आदि मौजूद रहीं।