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Varanasi News: पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग के पास कालेबुंड जिले में पहले सदगुरु ज्ञान मंदिर का उद्घाटन

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वाराणसी। कबीर की वाणी अब पूरब के प्रांतों में भी गूंजेगी। पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग के पास कालेबुंड जिले में पहले सदगुरु ज्ञान मंदिर का उद्घाटन कबीर प्राकट्यधाम लहरतारा के आचार्य संत हजूर अर्धनाम साहेब ने किया। 15 वर्षों में बनकर तैयार हुआ यह मंदिर पूर्वोत्तर भारत के करीब 10 राज्यों का इकलौता कबीर मंदिर होगा। यह चार विश्वा क्षेत्रफल में बना है। वहां काशी से 10 संत और 40 भक्त पहुंचे हैं।
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कबीर की जन्मस्थली कबीर प्राकट्यधाम लहरतारा के मूल पीठ से देश-विदेश में कबीर मंदिर और आश्रम खुले हैं। जबकि पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में अभी तक केवल चार आश्रम संचालित हैं। 12 मई को कबीर ज्ञान मंदिर के उद्घाटन में देशभर से 1500 साधु-संत और अनुयायी पहुंचे थे। लहरतारा मठ के व्यवस्थापक संतोष दास ने बताया कि मंदिर का उद्घाटन संत हजूर अर्धनाम साहेब ने किया। कालेबुंड जिले के गोरूबधान बस्ती बीचगांव में खुले इस कबीर मंदिर के महंत सर्वानंद दास ने बताया कि यह मंदिर वर्ष 2010 से बन रहा था। भक्तों के सहयोग से धीरे-धीरे मंदिर का निर्माण हुआ। अब पूर्वोत्तर भारत में पहला मंदिर खुलने से कबीर साहेब के जन्मोत्सव और निर्वाण दिवस के अलावा प्रतिदिन चौका आरती, भजन-कीर्तन और सत्संग के आयोजन होंगे। इस मंदिर में आसपास के राज्यों के अनुयायी भी आएंगे। यहां से पूरब के राज्यों में कबीरवाणी और उनके संदेशों को लोगों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
देशभर में हैं 2500 मठ व आश्रम, 500 मंदिर
कबीर साहेब के अनुयायी देश-विदेश में हैं। संतोष दास ने बताया कि भारत में करीब 2500 से अधिक मठ और आश्रम हैं, जबकि 500 से अधिक कबीर साहेब के मंदिर बने हैं। विदेशों में 150 से अधिक आश्रम और मंदिर खुले हैं। टोरंटो में भी मंदिर बन रहा है। मॉरीशस में खुले आश्रम के नए महंत के रूप में बीएचयू से शिक्षा ग्रहण कर चुके डॉ. श्यामदास को नियुक्त किया गया है।
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मध्यप्रदेश में एक और कबीर मंदिर
मध्यप्रदेश के कटनी जिले के सनकुई में सदगुरु कबीर मंदिर की स्थापना होगी। काशी के कबीर प्राकट्य स्थल लहरतारा से जुड़े इस मंदिर का उद्घाटन 18 मई को प्राकट्य स्थली के महंत गोविंद दास शास्त्री करेंगे। गोविंद दास ने बताया कि मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ कबीरपंथियों का गढ़ हैं। वहां हर जिले में आश्रम खुले हैं और मंदिर भी बनाए जा रहे हैं।
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