बीएचयू अस्पताल में जिस बच्चे की सर्जरी की गई, उसका जन्म समय से पहले सात महीने में हुआ था। जन्म के बाद से ही उसे समस्या हुई तो परिजनों ने पहले 15 दिन तक दूसरे अस्पताल में भर्ती कराया। जब राहत नहीं मिली तो बीएचयू अस्पताल के हृदय रोग विभाग में लेकर आए। यहां आने के बाद डॉ. प्रतिभा ने बच्चे को देखा और भर्ती करने का निर्णय लिया।
जब जांच कराई गई तो पता चला कि बच्चे के फेफड़े और शरीर के अन्य भागों में खून का प्रवाह बनाए रखने वाली नस पूरी तरह बंद नहीं थी। इसे चिकित्सकीय भाषा में पीडीए कहते हैं। जन्म के बाद सामान्य बच्चों में यह नस बंद हो जाती है, लेकिन प्री-मेच्योर बेबी (समय से पहले जन्मे बच्चे) में इस नस के बंद होने में दिक्कत होती है।
उन्होंने बताया कि दूरबीन विधि से सर्जरी कर बच्चे के दिल में एक डिवाइस डालकर उस नस को बंद किया गया। इसके बाद रक्त का प्रवाह सामान्य तरीके से होता रहेगा। डॉ. प्रतिभा ने कहा कि समय से पहले जन्मे बच्चों में पीडीए संबंधी समस्या होने पर जल्द से जल्द उसे बड़े चिकित्सा संस्थान में भर्ती करवाना चाहिए, इससे उसका बेहतर इलाज हो सकेगा। आईएमएस बीएचयू के निदेशक प्रो. एसएन संखवार ने सर्जरी करने वाली टीम को बधाई दी।
टीम में ये चिकित्सक रहे शामिल
सर्जरी करने वाली टीम में हृदय रोग विभाग से प्रो. विकास अग्रवाल, डॉ. प्रतिभा राय, डॉ. प्रताप, डॉ. नितेश, सीटीवीएस विभाग से प्रो. सिद्धार्थ लाखोटिया, एनेस्थीसिया विभाग से प्रो. एपी सिंह, डॉ. प्रतिमा, डॉ. संजीव, डॉ. अमृता शामिल रहीं। इसके अलावा नवजात देखभाल में डॉ. अनु, डॉ. स्वाति, डॉ. केशवन, डॉ. सोम ने भी अहम भूमिका निभाई।