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वाराणसीः हिंदू युवा वाहिनी के नेता पर फायरिंग के आरोपी मंदिर प्रबंध कमेटी के सचिव सहित दो गिरफ्तार

Mon, 19 Jul 2021 09:37 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

पुलिस ने आरोपी दोनों भाईयों के खिलाफ हत्या के प्रयास सहित अन्य आरोपों में मुकदमा दर्ज कर सोमवार को बीएचयू ट्रॉमा सेंटर से गिरफ्तार कर लिया। फायरिंग में इस्तेमाल पिस्टल भी पुलिस ने बरामद की। 
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फायरिंग के आरोपियों को पुलिस ने ट्रॉमा सेंटर से किया गिरफ्तार - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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वाराणसी के खोजवां स्थित संतोषी माता मंदिर की संपत्ति की लेकर मारपीट और फायरिंग मामले को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई अब शुरू हो गई है। हिंदू युवा वाहिनी के महामना मंडल उपाध्यक्ष अभिषेक पांडेय पर फायरिंग के आरोपी प्रबंध कमेटी के सचिव अतर सिंह और भाई राजबहादुर सिंह को भेलूपुर पुलिस ने सोमवार को बीएचयू स्थित ट्रॉमा सेंटर से गिरफ्तार कर लिया।
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इस दौरान लाइसेंसी पिस्टल भी पुलिस ने बरामद करते हुए जांच शुरू कर दी। पुलिस के अनुसार लाइसेंस निरस्त करने के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा जाएगा। बता दें कि रविवार रात मंदिर संपत्ति विवाद को लेकर मंदिर के पुजारी अभिषेक पांडेय को प्रबंध कमेटी के सचिव अतर सिंह ने गोली मार दी थी।

इस दौरान मंदिर के अन्य पुजारियों और आक्रोशित मुहल्ले के लोगों ने अतर सिंह और उसके भाई राजबहादुर सिंह को मारपीट कर घायल कर दिया था। पुजारी रवि की तहरीर पर भेलूपुर पुलिस ने आरोपी दोनों भाईयों के खिलाफ हत्या के प्रयास सहित अन्य आरोपों में मुकदमा दर्ज कर सोमवार को बीएचयू ट्रॉमा सेंटर से गिरफ्तार कर लिया। फायरिंग में इस्तेमाल पिस्टल भी पुलिस ने बरामद की। वहीं दूसरे दिन भी गोलीबारी वाले इलाके में एहतियातन पुलिस फोर्स तैनात रही। आवाजाही करने वालों पर पुलिस नजर बनाए रखी। 
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विश्वनाथ मंदिर न्यास में शामिल हो सकती है संतोषी माता मंदिर की संपत्ति

खोजवां के संतोषी माता मंदिर विवाद को लेकर मुहल्ले के लोग भी मुखर होने लगे हैं। इस मामले में धमार्थ कार्य मंत्री डॉ. नीलकंठ तिवारी ने कहा कि मोहल्ले और मंदिर से जुड़े लोग प्रस्ताव देंगे तो मंदिर की संपत्ति को विश्वनाथ मंदिर न्यास में शामिल किया जा सकता है। हालांकि इस पर अंतिम फैसला मंदिर से जुडे़ लोगों को ही करना है।

घटना के बाद मुहल्ले के लोगों ने आरोप लगाया कि अतर सिंह अपने सियासी रसूख और प्रभाव के चलते मंदिर पर कब्जा जमा रखा था। यहां तक कि मुहल्ले के किसी को भी मांगलिक कार्यक्रम मंदिर परिसर में नहीं करने दिया जाता था।

इस मामले में धमार्थ कार्य मंत्री डॉ. नीलकंठ तिवारी ने कहा कि मोहल्ले और मंदिर से जुड़े लोग प्रस्ताव देंगे तो मंदिर की संपत्ति को विश्वनाथ मंदिर न्यास में शामिल किया जा सकता है। हालांकि इस पर अंतिम फैसला मंदिर से जुडे़ लोगों को ही करना है।  
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1960 में मंदिर का निर्माण, 90 के दशक में बना ट्रस्ट

खोजवां मुहल्ले के लोगों ने बताया कि राजस्थान के प्रभुनारायण पालीवाल ने वर्ष 1960 में तीन बिस्वा जमीन खरीदकर संतोषी माता और शिव मंदिर का निर्माण करवाया था। वर्ष 1995 के करीब प्रभु नारायण की मौत के बाद मंदिर परिसर की जमीन पर कब्जा शुरू हो गया।  इसके बाद विश्व हिंदू परिषद के सहयोग से स्थानीय लोगों ने मंदिर परिसर को कब्जेदारों से मुक्त कराया था।

इसमें अतर सिंह की भी मुख्य भूमिका रही। 90 के दशक में मुहल्ले के लोगों ने मंदिर में ट्रस्ट बनाया तो कब्जेदारों से मुक्त कराने में अतर सिंह और उसके भाई राजबहादुर की अहम भूमिका होने से दोनों भाइयों को सचिव बनाया गया था। मंदिर खाली होने के बाद धीरे-धीरे अतर सिंह ने मंदिर के पिछले हिस्से में गाड़ी सर्विस सेंटर और बर्तन का कारखाना खोल दिया था।

लोगों के विरोध के बाद कारखाना बंदकर अतर सिंह ने बड़ा गेट लगाकर ताला बंद कर अपना कब्जा जमा लिया था। मंदिर के पुजारी के कमरे में भी अतर सिंह अपना ताला बंद किया जो अभी तक बंद है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अतर सिंह मंदिर की जमीन पर बहुमंजिला इमारत खड़ी करना चाहता है। 
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