शिकायत में यह भी कहा गया कि मामला सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अस्पताल प्रबंधक डॉ. दीपक कुमार पांडेय अपने स्टाफ के साथ कंचनपुर गांव पहुंचे और वहां से उनका वास्तविक नवजात पुत्र को वापस दिलाया। इसके बाद बच्चे को दोबारा अस्पताल में भर्ती कर उपचार किया गया और 28 मई को डिस्चार्ज किया गया। शिकायतकर्ता ने पुत्र को बेचने की कोशिश तथा पूरे मामले को दबाने के लिए धमकी देने का भी आरोप लगाया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने उप जिलाधिकारी सदर, क्षेत्राधिकारी नगर और अपर मुख्य चिकित्साधिकारी की तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की थी। समिति ने 10 जुलाई को अपनी रिपोर्ट सौंपते हुए बताया कि अस्पताल में भर्ती दोनों नवजात शिशुओं के पहचान टैग खराब होने और नए टैग लगाने में हुई गलती के कारण दोनों बच्चों की पहचान बदल गई। रिपोर्ट के अनुसार, स्टाफ नर्स नीतू यादव ने अपने बयान में स्वीकार किया कि मालिश के दौरान बच्चों के टैग खराब हो गए थे और नए टैग लगाने में त्रुटि हो गई।
जांच समिति ने यह भी पाया कि दूसरे दंपती की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। रिपोर्ट के मुताबिक, माधवी यादव ने अस्पताल में पहले ही शिकायत की थी कि उसके यहां पुत्री का जन्म हुआ था, जबकि उसे पुत्र सौंपा गया है। इसके बावजूद अस्पताल प्रबंधन ने शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया। बाद में 17 मई को रासेपुर स्थित एक निजी नर्सिंग होम में जांच के दौरान भी यह पुष्टि हुई कि उसके यहां पुत्री का जन्म हुआ था, लेकिन इसके बावजूद वह और उसके पति कन्हैया यादव नवजात लड़के को अपने साथ लेकर चले गए।
जांच रिपोर्ट के आधार पर उप मुख्य चिकित्साधिकारी एवं नोडल अधिकारी डॉ. आलेन्द्र कुमार की तहरीर पर सिधारी थाने में नीतू यादव, अनरजीत चौहान, जयकृष्ण शुक्ल, शशि कुमार पांडेय, माधवी यादव और कन्हैया यादव के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।