महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में अंतिम वर्ष की परीक्षा के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग और कोविड-19 के मानकों का खास ख्याल रखा जाएगा। बीएड प्रवेश परीक्षा की तर्ज पर ही एक कमरे में केवल 24 छात्रों को बैठाया जाएगा। हालांकि छात्र संगठन वार्षिक परीक्षा का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि संक्रमण की स्थिति में सुधार होने के बाद ही परीक्षाएं कराई जाएं।
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में अंतिम वर्ष की परीक्षाएं दो से 25 सितंबर तक चलेंगी। परीक्षा में वाराणसी के अलावा चंदौली, सोनभद्र, भदोही और मिर्जापुर के संबद्ध कालेजों के 72 हजार परीक्षार्थी शामिल होंगे। इसके लिए 168 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। वहीं कुछ जिलों में महाविद्यालयों को आइसोलेशन सेंटर या अस्थायी जेल बनाने की बात भी सामने आ रही है।
ऐसे परीक्षा केंद्रों के बारे में कुलसचिव डॉ. साहब लाल मौर्य का कहना है कि अगर किसी महाविद्यालय से ऐसी जानकारी मिलेगी तो उसके परीक्षा केंद्र में बदलाव किया जाएगा। फिलहाल अभी तक किसी ने भी ऐसी सूचना नहीं दी है। परीक्षा नियंत्रक कुलदीप सिंह ने बताया कि किसी भी परीक्षार्थी की परीक्षा छूट जाने और बहिष्कार करने की दशा में दोबारा परीक्षा नहीं होगी।
लिखित परीक्षा की समाप्ति के एक हफ्ते के भीतर मौखिक और प्रायोगिक परीक्षा होगी। इसके लिए परीक्षार्थी को अपने संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष और कालेज के प्राचार्य से संपर्क करना होगा। हरिश्चंद्र महाविद्यालय के छात्रसंघ महामंत्री अमन श्रीवास्तव का कहना है कि शासन और विश्वविद्यालय अपनी मनमानी पर उतारू हैं। बीएड प्रवेश परीक्षा के दौरान सभी परीक्षा केंद्रों पर सोशल डिस्टेंसिंग की जमकर धज्जियां उड़ाई गई थीं।
अधिकांश महाविद्यालयों के पास सैनिटाइजेशन और सोशल डिस्टेंसिंग का इंतजाम करने के संसाधन नहीं है। हरिश्चंद्र महाविद्यालय के मैदागिन क्षेत्र में ही काफी कोरोना संक्रमित मरीज हैं। हम लोगों ने कुलाधिपति को पत्र लिखकर संक्रमण समाप्त होने के बाद परीक्षा कराने की मांग की है।