फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

वर्दी का अंतिम संस्कार: रूस गए योगेंद्र का कंकाल भी नसीब नहीं हुआ, परिजन बोले- एजेंट को दी जाए फांसी; मातम

Sat, 18 Jul 2026 11:33 AM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, आजमगढ़।

सार

Azamgarh News: आजमगढ़ के योगेंद्र यादव का रूस-यूक्रेन युद्ध में मौत के बाद कंकाल तक परिजनों को नहीं मिल सका। रूस से भेजी गई उनकी वर्दी का ही परिवार ने अंतिम संस्कार किया। परिजनों ने युवक को नौकरी का झांसा देकर विदेश भेजने वाले एजेंट के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए उसे फांसी की सजा देने की मांग उठाई।
विज्ञापन
परिजनों ने दिया शहीद का दर्जा। - फोटो : संवाद
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

UP News: आजमगढ़ के कंधरापुर थाना क्षेत्र के खोजापुर माधोपट्टी गांव निवासी योगेंद्र यादव के परिजनों को अंतिम संस्कार के लिए उनकी बॉडी भी नहीं मिली। परिजनों ने रूस से आई उनकी वर्दी को ही चिता पर रखकर उसका अंतिम संस्कार किया। परिजनों ने कहा कि जिस एजेंट ने ऐसा किया है उसे सरकार फांसी की सजा दे। ताकि फिर किसी सिर से पिता और किसी मां की कोख न उजड़े।

विज्ञापन




खोजापुर माधोपट्टी गांव निवासी योगेंद्र के छोटे भाई आशीष यादव ने बताया कि मऊ के एजेंट विनोद यादव ने मेरे भाई को फंसा दिया। गार्ड की नौकरी के लिए लेकर गए और बार्डर पर भेज दिया। भाई 15 जनवरी 2024 को विनोद, सुमित और दुष्यंत नामक एजेंट के साथ रूस गए। उनको गार्ड और हेल्पर की नौकरी देने की बात कहकर ले जाया गया था। 
विज्ञापन


रूस पहुंचने के बाद उन्हें एक महीने की ट्रेनिंग देकर आर्मी में युद्ध के लिए भर्ती कर दिया गया। आशीष ने बताया कि भाई से अंतिम बार मई 2024 में बात हुई थी इसके बाद से भाई का कुछ पता नहीं चल सका है। भाई ने फोन पर बताया था कि 9 मई 2024 को युद्ध में उन्हें चोट लग गई थी। 

एंबेसी से हम लोगों ने बहुत कोशिश की लेकिन जानकारी नहीं मिल सकती है। जिले के कई और लोग भी वहां से लापता थे। सभी लोगों ने धन जुटाया और उनके बारे में पता करने के लिए दो लोग रूस तक गए। लेकिन, उनके बारे में कोई जानकारी नहीं हो सकी। तबसे हम लोग परेशान थे। हाल में दो लोगों के कंकाल आए थे, अब जाकर हमारे भाई के मौत की सूचना हमें प्राप्त हुई।

योगेंद्र की माैत पर बिलखतीं महिलाएं। - फोटो : संवाद
फोन पर मिली जानकारी विस्फोट में उड़ गई बॉडी
भाई सुनील कुमार यादव ने बताया कि हमारे पास फोन आया था। फोन करने वाले ने बताया कि योगेंद्र की मौत हो चुकी है। लेकिन, उसकी बॉडी या कंकाल नहीं मिलेगा। क्योंकि वह विस्फोट में उड़ गया। सेना में उसने जो वर्दी पहनी थी उसे भेज रहे हैं। जिला प्रशासन के पास से आप लोग उसे कलेक्ट कर लें। आज हम लोग डीएम के पास गए थे तो वहां से हमें उनकी वर्दी मिली।

चंद्रमा ऋषि आश्रम पर किया अंतिम संस्कार
योगेंद्र के भाई सुनील कुमार यादव ने बताया कि भाई का शरीर अंतिम संस्कार के लिए तो मिला नहीं। हमने जिला प्रशासन से मिली उनकी वर्दी को ही चंद्रमा ऋषि आश्रम पर ले जाकर उसका अंतिम संस्कार कर दिया। योगेंद्र के चार बच्चे हैं जिसमें तीन लड़कियां और एक लड़का है।
विज्ञापन

पत्नी बोली- एजेंट को फांसी की सजा दी जाए। - फोटो : संवाद
परिजनों ने दिया शहीद का दर्जा
शुक्रवार को जब हम योगेंद्र यादव के घर पहुंचे तो वहां काफी संख्या में लोग जुटे हुए थे। एक मेज पर योगेंद्र यादव की तस्वीर रखी हुई थी। तस्वीर के ईर्द गिर्द लोगों ने श्रद्धासुमन अर्पित किए थे। तस्वीर के ऊपर उनके नाम के साथ शहीद लिखा था।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें