वाराणसी। बदायुं की घटना पर आधारित फिल्म आर्टिकल 15 को लेकर हंगामे की आशंका पर शहर के सभी सिनेमाघरों पर पुलिस बल तैनात की गई थी। हालांकि कुछ भी ऐसा नहीं हुआ। युवाओं ने इस फिल्म को भारतीय संविधान और उसकी नागरिकता को बड़े ही अलग ढ़ंग से प्रस्तुत किया गया है।
बिना किसी भेद भाव के हर नागरिक को समानता का अधिकार और नागरिकों के मूलभूत अधिकार के इर्द गिर्द घूमती आयुष्मान खुराना की फिल्म शुक्रवार को सिनेमा घरों में रिलीज हुई। कुछ लोगों ने इस फिल्म को कुछ दिनों पहले हुई बदांयु की घटना से भी जोड़ दिया। इससे महौल बिगड़ने की आशंका पुलिस को हो गई। इसको देखते हुए कैटोमेंट स्थित जेएचवी, पीडीआर, आईपी सिनेमा और केसीएम सभी जगहों पर पुलिस बल तैनात रही। हालांकि पहले दिन हर जगह महौल शांतिपूर्ण रहा।
आर्टिकल 15 बहुत ही सेंसेटिव सब्जेक्ट की फिल्म है। इसे देखना चहिए इसमें देश के संविधान को दर्शाते तैयार किया गया है। कुल मिलाकर फिल्म अच्छी लगी।
विजय माल्या अस्सी क्षेत्र निवासी
फिल्म जबरदस्त है आयुष्मान खुराना की इसमें दमदार एक्टिंग हैं, जोे एकदम मस्त हैं। बिना किसी भेद भाव के सभी को संविधान में दिए गए अधिकार फिल्म का सब्जेक्ट अच्छा लिया गया है
इकबाल चौकाघाट निवासी
एसएसपी से की शिकायत
सोशल मीडिया पर चल रहे फिल्म आर्टिकल 15 का 2 मिनट 56 सेकण्ड के ट्रेलर को सोशल मीडिया से हटवाने, फ़िल्म से आपत्तिजनक संवादों को निकालने के साथ ही दोषी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग एसएसपी से की गई है। स्वामी धर्मदत्त महाराज द्वारा दिए गए आवेदन में कहा गया कि ट्रेलर बदायूं में 2014 कई घटना पर आधारित है। इसलिए इस पर राक लगाने की कार्रवाई की जानी चाहिए।