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कोरोना के डर ने कई बनारसियों को मुंह से छीन लिया तंबाकू, मार्च से बढ़ी नशा छोड़ने वालों की संख्या

Wed, 19 Aug 2020 01:33 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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tobacco - फोटो : tobacco
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कोरोना वायरस के संक्रमण से सबसे ज्यादा मौतें फेफड़े में संक्रमण और किडनी संबंधी बीमारियों से ग्रसित लोगों की हुई हैं। तंबाकू का सेवन करने वालों के लिए महामारी और घातक हो जाती हैं। कोरोना काल में मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा के नशा उन्मूलन केंद्र पहुंचे 800 लोगों ने चिकित्सकों की सलाह पर तंबाकू से तौबा कर ली है।

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चिकित्सकों के अनुसार, एक तो थूकने की वजह से संक्रमण तेजी से फैलता है, दूसरा रोग प्रतिरोधक क्षमता पर भी तंबाकू सेवन का प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। नशा उन्मूलन केंद्र के आंकड़ों के अनुसार, कोरोना काल से पहले 500 से 600 लोग हर महीने काउंसलिंग के लिए पहुंचते थे।


मार्च से शुरू हुए कोरोना काल में लोग घरों से नहीं निकल रहे थे, इसके बावजूद 18 साल से 70 साल तक के औसतन 150 से 200 लोग हर महीने नशा उन्मूलन केंद्र पहुंचे। केंद्र पर तैनात मनोवैज्ञानिक अजय श्रीवास्तव के मुताबिक, लोगों को तंबाकू से होने वाली बीमारियों और शरीर के अलग-अलग अंगों पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव के बारे में बताया जाता है।

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स्वास्थ्य विभाग की ओर से निर्धारित दवा भी दी जाती है। पहले की अपेक्षा अब लोग ज्यादा सतर्क हुए हैं। मार्च से लेकर अब तक करीब 800 लोगों ने तंबाकू से तौबा कर ली।

केस-1 
विशेश्वरगंज के 65 वर्षीय व्यापारी ने लंबे समय तक तंबाकू का सेवन किया। अब वह नशा उन्मूलन केंद्र में पहुंचे और तंबाकू छोड़ने की इच्छा जताई है। उन्होंने कहा कि अगर मन बना लिया जाए तो तंबाकू छोड़ना मुश्किल नहीं है।
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केस-2
लल्लापुरा निवासी 37 वर्षीय युवक ने भी मंगलवार को नशा उन्मूलन केंद्र पहुंचकर अपना नाम दर्ज कराया। उन्हें तंबाकू से होने वाली बीमारियों के बारे में जानकारी दी गई। अब वह तंबाकू से दूर रहना चाहते हैं। 

 तंबाकू सेवन और थूकने से कोरोना संक्रमण की संभावना बढ़ जाती है। इसे देखते हुए लोगों से तंबाकू का सेवन न करने की अपील की जा रही है। जिलाधिकारी के निर्देश पर सोशल मीडिया के जरिये भी प्रचार प्रसार किया जा रहा है। तंबाकू छोड़ने के लिए जो लोग आते हैं, उन्हें इसके लिए प्रेरित किया जा रहा है। -डॉ. सौरभ प्रताप सिंह, जिला सलाहकार, राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम
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