एक भाई और दो बहनों में सबसे छोटी बजरडीहा निवासी अंजली ने बताया कि महमूरगंज के निवेदिता शिक्षा सदन से खो-खो खेलना शुरू किया। कक्षा नौ में कुश्ती की ओर रुझान हुआ। कुश्ती छात्रावास के लिए ट्रायल में हारकर रोने लगी थी। कोच गोरख यादव ने मनोबल बढ़ाया।
प्रतिभा के आगे संसाधन मायने नहीं रखते हैं। बजरडीहा में ठेले पर फलों के जूस बेचने और जनरल स्टोर चलाने वाले की बेटियों ने कुश्ती में कमाल कर दिया। महात्मा गांधी विद्यापीठ से संबद्ध कॉलेजों से स्नातक कर रहीं अंजली और श्रृष्टि का चयन चंडीगढ़ में होने वाली अंतर विश्वविद्यालयीय कुश्ती के लिए हुआ है। रोहतक में हुई पूर्वोत्तर जोन की कुश्ती में शानदार प्रदर्शन करने पर दोनों को इसका इनाम मिला है।
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एक भाई और दो बहनों में सबसे छोटी बजरडीहा निवासी अंजली ने बताया कि महमूरगंज के निवेदिता शिक्षा सदन से खो-खो खेलना शुरू किया। कक्षा नौ में कुश्ती की ओर रुझान हुआ। कुश्ती छात्रावास के लिए ट्रायल में हारकर रोने लगी थी। कोच गोरख यादव ने मनोबल बढ़ाया। इसके बाद सिगरा में नियमित अभ्यास करने लगी। करीब 15 दिन बाद ही उनका चयन सब जूनियर के लिए हो गया। मैनेजर डॉ. अरविंद्र कुमार ने बताया कि श्रृष्टि का चयन 72 किलो और अंजली का 62 किलो भार वर्ग में हुआ है।
श्रृष्टि के पिता चलाते हैं जनरल स्टोर
श्रृष्टि ने बताया कि कक्षा छह से ही खेल की ओर रुझान था। गुरुबाग के गुरुनानक स्कूल में 10वीं तक खोखो खेला। पिता अशोक यादव के कहने पर 12वीं से कुश्ती खेलना शुरू किया। अशोक जनरल स्टोर चलाते हैं। श्रृष्टि 2022 से बीएचयू के शिवाजी हॉल में अभ्यास कर रही हैं।