किसानों को अब बिचौलियों से राहत मिल सकेगी और फसलों को बेचने के लिए दर-दर नहीं भटकना पड़ेगा। किसान जैविक फसल, खाद और ईंधन सीधे खरीददार को बेच सकेंगे। इसके लिए आईआईटी बीएचयू के मालवीय नव प्रवर्तन एवं उद्यमिता संवर्धन केंद्र और इंडियन बायोगैस एसोसिएशन ने बुरहानी फाउंडेशन इंडिया की मदद से बायोगैस ऐप डिजाइन किया है।
केंद्र के समन्वयक प्रो. पीके मिश्रा ने बताया कि इस मोबाइल एप्लीकेशन का मुख्य उद्देश्य किसानाें को ऐसा प्लेटफार्म उपलब्ध कराना है जहां से उन्हें उनकी फसल के लिए बेहतर खरीददार मिल सकें। इससे किसानों के साथ उद्यमियों को भी फायदा पहुंचेगा।
किसानाें को अपने मोबाइल पर बायोगैस एप्लीकेशन डाउनलोड करना होगा। इस एप्लीकेशन में रजिस्ट्रेशन कराने के लिए विक्रेताओं से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। ऐप का परीक्षण वाराणसी से शुरू हो रहा है। अगले साल इसे आधिकारिक रूप से लांच किया जाएगा।
गंगा जल की स्वच्छता की निगरानी करेगा आईआईटी बीएचयू
प्रयागराज में अगले महीने से शुरू हो रहे अर्द्ध कुंभ मेले में स्नानार्थियों को गंगा का स्वच्छ जल मिले, इसकी जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने आईआईटी बीएचयू को दी है। कुंभ मेले के दौरान आईआईटी की टीम उद्योगों से निकलने वाले अवजल के प्रदूषण मानक की मॉनीटरिंग करेगी।
राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के तहत कानपुर के 34 उद्योगों, दो सीईटीपी और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से निकलने वाले अवजल और मलजल की तीन चरणों में मॉनिटरिंग और जांच की जाएगी। जांच टीम के प्रोजेक्ट इंचार्ज व केमिकल इंजीनियरिंग के हेड प्रो. पीके मिश्रा ने बताया कि पहले चरण में 23 दिसंबर से 30 दिसंबर, दूसरे चरण में 23 जनवरी 2019 से 27 जनवरी 2019 और तीसरे चरण में पांच फरवरी 2019 से 10 फरवरी 2019 के बीच अवजल की जांच आईआईटी बीएचयू के एक्सपर्ट करेंगे।
इन 34 उद्योगों में डाई, ब्लीचिंग, टेक्सटाइल और डेयरी से जुड़े उद्योग हैं। उन्होंने बताया कि कुंभ मेले के दौरान जो उद्योग मानक के अनुसार अवजल का उत्सर्जन नहीं करेंगे, उन्हें कुंभ मेले के दौरान बंद करने की संस्तुति की जाएगी। आईआईटी बीएचयू के अलावा चार अन्य संस्थानों को दूसरे उद्योगों की जांच की जिम्मेदारी दी गई है।