राम नगर की रामलीला में पात्रों के भाव, वस्त्र तो देखने के लिए लोग पहुंच ही रहे हैं, तरह-तरह के वेश-बाना में लीला प्रेमियों को भी कैद करने की होड़ मची हुई है। शुक्रवार की शाम किले से शाही सवारी निकली तो लोगों ने मोबाइल से उन दृश्यों को कैद करने के जतन शुरू कर दिए। कोई चाय की दुकानों की आड़ से तो कोई भीड़ के बीच से। जयंत नेत्रभंग की लीला के लिए रामबाग पोखरे से लेकर लक्ष्मीनारायण मंदिर तक लीला प्रेमियों के सजने-संवरने के अंदाज देखते बने...।
सीता चरन चोंच हति भागा/मूढ़ मंदमति कारन कागा/ चला रुधिर रघुनायक जाना/ सींक धनुष सायक संधाना/नारद देखा बिकल जयंता/लागि दया कोमल चित संता/ पठवा तुरत राम पहिं ताही/कहेसि पुकारि प्रनत हित पाही....। शुक्रवार को रामनगर की रामलीला की शुरुआत देवराज इंद्र के पुत्र जयंत के कौए का वेश धरकर पहुंचने से हुई। श्रीराम वनमाला का आभूषण बनाकर सीता जी को पहना रहे थे, उसी समय जयंत कौए का वेश बनाकर आता है। सीता के चरण में चोंच मारकर भागने लगता है। यह देख श्रीराम सींक के वाण का संधान करते हैं।
श्रीराम उसकी एक आंख फोड़ देते हैं। इसके बाद सीता समेत दोनों भाई अत्रि मुनि के आश्रम पहुंचते हैं। इसके बाद सभी अनुसुइया जी से मिलते हैं। यहां से मतंग ऋषि के आश्रम पहुंचते हैं। आश्रम से आगे बढ़ने के बाद विराध सीता को चुरा लेता है। राम उसका वध कर देते हैं। उधर, राम सुतीक्षण के आश्रम में मुनियों को गले लगाते हैं। आगे बढ़ने पर गिद्धराज से भेंट होती है। फिर वह पंचवटी पहुंच जाते हैं।