मशहूर शायर मुनव्वर राना अब नहीं रहे। मुनव्वर राणा को पूरी दुनिया में उर्दू अदब में विशेष मुकाम हासिल रहा। मुनव्वर राणा कई बार बनारस आए। अंतिम बार 2017 में सनबीम वरुणा में आयोजित मुशायरे में हिस्सा लेने आए थे।
मोहब्बत में तुम्हें आंसू बहाना नहीं आया, बनारस में रहे और पान खाना नहीं आया, न जाने लोग कैसे है मोम कर देते है पत्थर को, हमें तो आप को भी गुदगुदाना नहीं आया... जैसे न जाने कितनी नज्में बनारस को नवाजने वाले प्रख्यात शायर मुनव्वर राना अब नहीं रहे। वह कई बार बनारस आए। यहां इंडो-पाठ मुशायरा में कई बार उन्होंने शिरकत की।
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मुनव्वर राना के साथ बनारस के शायर स्व. सुलेमान आसिफ, निजाम बनारस और हफीज बनारसी सहित तमाम शायरों ने मंच साझा किए। निजाम बनारसी ने बताया कि वह आखिरी बार 2017 में सनबीम वरुणा में आयोजित मुशायरे में आए थे।
बनारस के सबसे बड़ा इंडो-पाक मुशायरा बेनियाबाग में होता था। इसमें मुनव्वर राना कई बार आए। उन्होंने बनारस की रवायत और रवानी पर कई नज्में पेश कीं। उनका बनारस पर मोहब्बत में तुम्हें आंसू बहाना नहीं आया बनारस में रहे और पान खाना नहीं आया... काफी मशहूर था। उन्होंने बताया कि पितरकुंड आजाद पार्क में भी आयोजित मुशायरे में भी आए थे। वह बीएचयू में भी कार्यक्रम में शामिल हुए थे। सुलेमान आसिफ के बेटे नोमान हसन ने बताया कि मैंने बचपन में अपने पिताजी के साथ उनसे मुलाकात की थी।