पीड़ित प्रकाश चंद्र विश्वकर्मा का आरोप है कि जिला प्रशासन की ओर से कोई भी अधिकारी समीक्षा तक करने नहीं आया। इस ठंड में टेंट लगाकर बच्चों सहित पांच लोग रह रहे हैं। जिस बाइक रिपयेरिंग की दुकान से परिवार की गाड़ी चलती थी, आग में सब कुछ नष्ट हो गया। प्रकाश मोटरसाइकिल मरम्मत का काम करता है।
पड़ोसियों की मदद ने अब तक रखा है जिंदा
बेघर हो चुके प्रकाश विश्वकर्मा ने कहा कि अब तक पड़ोसियों के सहारे ही जिंदा हूं। उनकी मदद से राशन, पानी का जुगाड़ हो पा रहा है। आग से घर की दीवारें और छत ढह चुकी हैं। उसमें रहना नहीं हो पा रहा है। सरकार की ओर से आर्थिक मदद मिले तो फिर किसी तरह जीवन सुगमता से चले।