पूज्यपाद बाबा औघड़ गुरुपद संभव राम ने कहा कि आज परिवारों के विघटन, दाम्पत्य जीवन में बढ़ते तनाव और सामाजिक असंतोष का प्रमुख कारण लोभ, अहंकार तथा संवादहीनता है। केवल महिलाओं को दोषी ठहराना उचित नहीं, बल्कि पति, परिवार और समाज सभी को आत्म चिंतन करने की जरूरत है।
सर्वेश्वरी समूह आश्रम पड़ाव में तीन दिवसीय गुरु पूर्णिमा महोत्सव के समापन पर आयोजित महिला एवं युवा सम्मेलन में पीठाधीश्वर औघड़ गुरुपद संभव राम ने कहा कि विवाह के बाद बेटी अपना घर-परिवार छोड़कर नए परिवेश में आती है। ऐसे में उसे सम्मान, सहयोग और अपनापन मिलना चाहिए। वहीं नववधू को भी नए परिवार के अनुरूप स्वयं को ढालने का प्रयास करना चाहिए। दोनों पक्षों की संवेदनशीलता से ही परिवार सुखी और सुदृढ़ बन सकता है।
उन्होंने कहा कि ईश्वर ने मनुष्य को बुद्धि और विवेक दिया है, इसलिए किसी भी बात का अंधानुकरण नहीं, बल्कि समय और परिस्थिति के अनुरूप विवेकपूर्ण निर्णय लेना चाहिए। कर्मफल का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने कर्मों का फल अवश्य भोगना पड़ता है, इसलिए जीवन में सदाचार और सेवा का मार्ग अपनाना आवश्यक है। मोह-माया का त्याग करने का अर्थ घर-परिवार छोड़ना नहीं, बल्कि मन के विकारों-लोभ, क्रोध, अहंकार, ईर्ष्या और द्वेष का परित्याग करना है।
उन्होंने अनुयायियों को महापुरुषों की वाणी, मानवता सेवा और सदाचार को जीवन में अपनाने तथा आने वाले समय की चुनौतियों के लिए मानसिक और आध्यात्मिक रूप से तैयार रहने का आह्वान किया। अध्यक्षता प्रयागराज की दुर्गावती चौधरी ने की। संस्था के उपाध्यक्ष सुरेश सिंह, संतोष मिश्रा, प्रकाश पृथु, गोपाल शंकर श्रीवास्तव, सोनी, स्वीटी, शैलजा शाहदेव, श्वेता श्रीवास्तव ने विचार रखे। नीलिमा सिंह और कुमारी पूर्णिमा ने भजन पेश किया। संचालन सुष्मिता और धन्यवाद ज्ञापनमंत्री डॉ. एसपी सिंह ने किया। इसके पूर्व श्री सर्वेश्वरी समूह का 65वां अखिल भारतीय वार्षिक अधिवेशन हुआ। इसमें आश्रम के कल्याणकारी कार्यों पर चर्चा हुई।