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अक्षयवट वृक्ष का गिरना अशुभ, संत समाज में रोष

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वाराणसी। काशी विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र में अक्षयवट वृक्ष का अचानक धराशायी होना अशुभ है। काशी के संत समाज ने इस घटना पर रोष जताया है। साथ ही कहा कि यह वृक्ष काशी की जनता व संतों की आस्था का केंद्र था। वृक्ष न होने से देवता तो मूर्ति स्वरूप रह सकते हैं लेकिन देवत्व नहीं रह जाता है। दोषियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए।
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काशी विद्वत परिषद के संगठन मंत्री पं. दीपक मालवीय व ज्योतिषाचार्य पं. गणेश मिश्र ने बताया कि वराहमिहिर कहते हैं कि सलिललोद्यावयुक्तेषु कृतेष्वकृतकेषु च। स्थानेष्वतेषु सान्निध्यमुपगच्छन्ति देवता: अर्थात कृत्रिम, अकृत्रिम जल उपवन से समन्वित स्थान के समीप देवताओं का आगमन होता है। देवालय के समीप वृक्ष अवश्य होना चाहिए, ताकि उन वृक्षों पर पक्षी कलरव करें। तभी देवता उस मंदिर में निवास करते हैं। वृक्ष से युक्त मंदिरों में ही देवता विहार करते हैं। अत: मंदिर प्रशासन को चाहिए कि वह दूसरा वट वृक्ष लगाएं।
निंदनीय घटना
अक्षयवट वृक्ष का धराशायी होना निंदनीय है। आरंभ में ही कहा था कि पूज्यों की पूजा में व्यतिक्रम दुर्भिक्ष, मरण और भय लाता है। इसके पूर्व गोविंदेश्वर महादेव के पास पीपल का पेड़ काट दिया गया। कई प्राचीन कूप पाट दिए गए।
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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती, श्री विद्यामठ
दोषियों पर हो कार्रवाई
प्रकृति हमसे कुपित है। ग्रहों की चाल ठीक नहीं है। आगामी 15 दिन ठीक नहीं हैं। भयंकर अपशकुन है। विश्व में महामारी और आपदा कारी घटनाएं हो रही हैं। सभी सुरक्षित रहें और सकारात्मक बने रहें। जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई हो।
स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती, राष्ट्रीय महामंत्री, अखिल भारतीय संत समाज
नष्ट कर रहे धरोहर
अक्षयवट वृक्ष के धराशायी होने की जितनी निंदा की जाए कम है। एक तरफ हम ऑक्सीजन की बात करते हैं और दूसरी तरफ इस तरह के अति प्राचीन धरोहर को नष्ट कर रहे हैं। जो भी दोषी है, उस पर सख्त कार्रवाई की जाए।
प्रो. रामनारायण द्विवेदी, महामंत्री, काशी विद्वत परिषद
पहले ही ऑक्सीजन की है कमी
काशी वासियों की आस्था का प्रतीक अक्षयवट वृक्ष का धराशायी होना दुखदायी है। नियमित दर्शनार्थियों के लिए यह पूजनीय था। ऐसे ही देश में ऑक्सीजन की कमी है। वृक्ष को भी धराशायी कर दिया गया। इसकी जांच होनी चाहिए।
पूनम कुंडू, नियमित दर्शनार्थी
आपदा कानून का उल्लंघन
वट वृक्ष को ऐसे समय में काट देना जीवनहंता का काम है। चारों तरफ ऑक्सीजन के लिए हाहाकार मचा है। इसकी कमी से अनेकानेक मृत्यु हो रही है। यह जानते हुए भी सिर्फ पेड़ ही हैं जो समस्त जीवों को ऑक्सीजन प्रदान करते हैं। यह कृत्य आपदा कानून का उल्लंघन है।
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शत रुद्र प्रकाश, एमएलसी सपा
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