हर 12 साल पर बदल जाती है प्रतिमा
अयोध्यानाथ के पुत्र शिवशरण, पोते जगन्नाथ, इनके बेटे नारायण पांडेय ने जीवनभर मंदिर के प्रधान पुजारी की जिम्मेदारी संभाली। अभिषेक पांडेय ने बताया कि पूर्णिमा स्नान से बीमार पड़े भगवान जगन्नाथ को रोज काढ़े का भोग लग रहा है। छह जून की शाम को प्रोक्षण विधि से पूजा कर भगवान का आह्वान किया जाएगा।
इसके बाद आम भक्तों के लिए दर्शन-पूजन शुरू हो जाएगा। सात से नौ जून तक रथयात्रा मेला लगेगा। इस मंदिर में भगवान पुरुषोत्तम और शालिग्राम का भी विग्रह है। वहीं, ब्रह्माघाट पर भी भगवान जगन्नाथ, सुभद्रा और बलभद्र की छोटी प्रतिमा स्थापित है। यहां भी रथयात्रा पर दर्शन-पूजन होता है।
भगवान जगन्नाथ, सुभद्रा और बलभद्र की प्रतिमा लकड़ी होती है। हर 12 साल बाद उनकी प्रतिमा बदल जाती है। पं. अभिषेक पांडेय ने बताया कि नई प्रतिमा प्राण प्रतिष्ठा के बाद स्थापित होती है। मेरे पिता जी ने ये प्रतिमा 2013 में बनवाई थी। अब अगले साल ये प्रतिमाएं बदली जाएंगी। प्रतिमा नीम, चंदन और बेल की लकड़ी से बनती है। ओडिशा के कारीगर इन्हें बनाते हैं।