पौष पूर्णिमा पर गंगा स्नान के साथ ही माघ माह के अनुष्ठान भी आरंभ हो गए। कोरोना और ठंड पर आस्था भारी पड़ी। गलन और सात डिग्री तापमान के बीच श्रद्धालुओं ने सुरसरि के तट पर पूर्णिमा का स्नान किया। गंगधार का आशीर्वाद लेकर श्रद्धालु गंगाधर के दरबार पहुंचे और बाबा विश्वनाथ का दर्शन किया।
अस्सी से लेकर राजघाट के बीच सभी प्रमुख घाटों पर स्नान के लिए श्रद्धालु पहुंचते रहे। सोमवार को पौष पूर्णिमा पर गंगा स्नान के लिए भीड़ उमड़ पड़ी। पहली डुबकी के साथ माघ पर्यंत स्नान की शुरुआत हो गई। जो माघ पूर्णिमा 16 फरवरी तक चलेगा। संत-महात्माओं के साथ ही भक्तों ने भी हर-हर गंगे के उद्घोष के साथ पवित्र डुबकी लगाई। इसके बाद पूजन-अर्चन व दान-पुण्य किया। कड़ाके की ठंड के बावजूद लोगों का उत्साह कम नहीं था। ठंड के बाद भी प्रमुख घाटों पर स्नानार्थियों की खासी भीड़ रही।
स्नान-दान के बाद श्रद्धालुओं ने श्री काशी विश्वनाथ और अन्नपूर्णा मंदिर सहित अन्य देवालयों में विधिविधान से पूजा-अर्चना की। स्नान-ध्यान के लिए भोर से ही भक्तों की भीड़ लग गई थी। इस दौरान तटों पर दीप जलाकर कहीं मंगल कामनाएं की गईं तो कहीं अर्घ्य दिया गया। शीतला घाट, प्रयाग घाट, अहिल्याबाई घाट, मुंशी घाट, हनुमान घाट, तुलसी घाट, मीर घाट, रामघाट, पंचगंगा घाट, प्रह्लाद घाट, गायघाट और राजघाट पर स्नान के लिए अलग-अलग इलाके के श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगा रहा।
माघ में खास स्नान पर्व
मौनी अमावस्या - 01 फरवरी
वसंत पंचमी - 05 फरवरी
माघी पूर्णिमा - 16 फरवरी